राज्‍यों के सहयोग के बिना आर्थिक नीति सफल नहीं हो सकती

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भारतीय राज्य आर्थिक विकास, सुशासन के नये आयामों और जन-कल्याण के लिये स्व-प्रेरित प्रयास कर रहे हैं। समकालीन भारत में राज्‍यों के सहयोग के बिना कोई भी आर्थिक नीति या पहल सफल नहीं हो सकती। अधिकारों के हस्तांतरण के साथ ही जिम्मेदारी, वित्तीय अनुशासन, सक्षम ऋण प्रबंधन और प्रभावी लोक प्रशासन और व्यापार अनुकूल वातावरण का निर्माण करना जरूरी है। भविष्य में सेवाओं के प्रदाय की प्रभावी व्यवस्था और इसके लिये नवाचारी प्रयास ही प्रशासकीय क्षमता और दक्षता के मापदण्ड बनेंगे।

श्री चौहान पाँच अक्टूबर को अमेरिका के मिशिगन विश्वविद्यालय में रास बिजनेस स्कूल के इंडिया समिट-;भारत सम्मेलन कार्यक्रम में ”आंतरिक बदलाव – राज्य संचालित विकास” विषय पर व्याख्यान दे रहे थे। इस अवसर पर रास बिजनेस स्कूल में मास्टर आफ सप्लाय चैन मैनेजमेंट के प्रोफेसर श्री रवि अनूप इंडी, मिशिगन शहर के उद्योगपति एवं स्कूल के विद्यार्थी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कल्याणकारी योजनाओं और लोक निर्माण के कार्यों के लिये केन्द्र सरकार पर निर्भरता कम होती जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य को अपने विकास के लिये स्वयं सोचना पडता है और राज्य की परिस्थितियों के अनुकूल कार्यक्रम और योजनाएँ बनानी पड़ती हैं। इसके लिये नवाचारों और धन की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि भारत का आर्थिक उदय मध्यप्रदेश और मध्यप्रदेश का आर्थिक उदय भारत के लिये अच्छा है।

ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में भारत की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर 7.9 प्रतिशत रही जबकि इसी अवधि में मध्यप्रदेश की आर्थिक वृद्धि दर 10.2 प्रतिशत रही। पिछले साल 2011-12 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रही जबकि मध्यप्रदेश ने 11.98 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि दर हासिल की, जो लगभग दो गुना ज्यादा है।

वर्ष 2003-2004 में मध्यप्रदेश का वित्तीय घाटा 7.12 प्रतिशत था जो वर्ष 2010-11 में घटकर 1.94 प्रतिशत रह गया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश अपने आर्थिक संसाधनों को अनुपयोगी रूप से व्यय करने के बजाय समझदारी के साथ उन्नति करने में विश्वास रखता है। वर्ष 2003-04 में राजस्व आय का 22 प्रतिशत ब्याज भुगतान में खर्च हो रहा था अब यह केवल 9 प्रतिशत रह गया है।

शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा प्रदाय के क्षेत्र में विकेन्द्रित नियोजन के माध्यम से इन क्षेत्रांे को सशक्त बनाने पर विचार चल रहा है। राज्य सरकार सेवा प्रदाय के लिये नियमों में और अधिक स्वायत्तता और लचीलापन लाने के प्रयास कर रही है। इसके लिये राष्ट्रीय ट्रेजरी मैनेजमेंट ऐजेंसी स्थापित करने का प्रस्ताव है। सभी राज्य इस व्यवस्था के हितग्राही होंगे।

मध्यप्रदेश भारतीय गणतंत्र का उभरता हुआ राज्य है। राज्य को आगे बढ़ाने के लिये किसानों की सेवा और कृषि क्षेत्र का विस्तार सबसे जरूरी है। साथ ही सड़कों के विस्तार, गरीबी का खात्मा, लिंग भेद समाप्त करना जैसे और भी चुनौतीपूर्ण काम हैं जिसके लिये लगातार प्रयास किये जा रहे हैं।

मध्यप्रदेश सरकार के नवचारी प्रयासों की चर्चा करते हुए मुख्‍यमंत्री ने कहा कि भविष्य में सेवाओं के प्रदाय और सेवा प्रदाय में नवाचार ही प्रशासकीय क्षमताओं का मापदण्ड बनेंगे। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश औद्योगिक प्रदेश बनने के लिये पूरे प्रयास कर रहा है लेकिन कृषि प्रदेश के रूप में अच्छी तरह स्थापित हो चुका है।

कृषि क्षेत्र के लिये किये प्रयासों की जानकारी देते हुए कहा कि कृषि केबिनेट एक अनूठी पहल साबित हुई है। इसी प्रकार कृषि के लिये राज्य के कुल बजट का 18 प्रतिशत रखा गया है। उन्होंने कहा कि सिंचाई संसाधनों में वृद्धि, बिना ब्याज के कृषि के लिये कर्ज देने, गाँवों में बिजली देने, कृषि उपज के भण्डारण में बोनस देने, उद्यानिकी फसलों के संकुल बनाने, लघु स्तर पर सिंचाई का विस्तार करने और बीज बैंक बनाने जैसे प्रयासों का कृषि क्षेत्र की वृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। कृषि क्षेत्र को आर्थिक सुरक्षा का मुख्य मापदण्ड बताते हुए उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र की प्रगति से मानव विकास के संकेतकों को और पोषण के स्तर बढ़ाने में मदद मिलेगी।

अधोसंरचना विकास की चर्चा करते हुए कहा कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी से सड़क निर्माण के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हुआ है। मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम ने राज्य की सड़कों के गुणवत्तापूर्ण ढीजजचरूध्ध्गुणवत्तापूर्णझ निर्माण में मुख्य भूमिका निभाई है। जिन विकास और निर्माण परियोजनाओं को राज्य की वित्तीय सहायता की जरूरत होती हैं उन्हें राज्य सरकार अपने खजाने से मदद करती है। निजी कंपनियों के साथ विकास में सहभागी के रूप में व्यवहार करने से सरकार पर उनका विश्वास बढ़ा है। पारदर्शी प्रक्रिया से उन्हें अविलम्ब भुगतान हो रहा है।

बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने और उनके जन्म के प्रति पारंपरिक दृष्टिकोण और मानसिकता बदलने के लिए किये गये प्रयासों विशेष रूप से लाड़ली लक्ष्मी योजना के संदर्भ में श्री चौहान ने कहा कि निकट भविष्य में मध्यप्रदेश को शिक्षित, स्वस्थ, आत्म-विश्वासी और अधिकार-संपन्न महिला-शक्ति मिलेगी, जो मध्यप्रदेश के नवनिर्माण में अपना रचनात्मक योगदान देगी।

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