स्वर्णिम मध्यप्रदेश के निर्माण में शिक्षक योगदान करे

भोपाल, सितम्बर 2015/ स्कूल शिक्षा मंत्री पारस जैन ने शिक्षकों से स्वर्णिम मध्यप्रदेश के निर्माण में योगदान का आव्हान किया है। 54 वें राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में उन्होंने शिक्षकों की तुलना उस दीपक से की जो स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाश देता है। श्री जैन ने शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने सहित अन्य सुविधाओं से युक्त ‘एम शिक्षा-मित्र’ मोबाइल एप को भी लांच किया। एप 25 सितम्बर से पूरे प्रदेश में काम करेगा।

समारोह में आदिम-जाति कल्याण मंत्री ज्ञान सिंह, स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री दीपक जोशी, माध्यमिक शिक्षा मंडल की अध्यक्ष सुरंजना रे, प्रभारी अपर मुख्य सचिव स्कूल शिक्षा पी.सी. मीना, आयुक्त राज्य शिक्षा केन्द्र दीप्ति गौड़ मुखर्जी, आयुक्त लोक शिक्षण डी.पी. अग्रवाल, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान की अपर मिशन संचालक सुनीता त्रिपाठी उपस्थित थे।

श्री जैन ने कहा कि एम-शिक्षा मित्र नि:शुल्क तैयार किया गया है। इससे शिक्षक वर्ग अनेक सुविधाओं का लाभ उठा सकेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से शिक्षकों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री की चिंता है कि कैसे शिक्षकों का कल्याण तथा उनके सम्मान में और अधिक वृद्धि हो।

शिक्षा की गुणवत्ता में आए सुधार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की मंशा के अनुरूप मध्यप्रदेश स्कूलों में बालक-बालिकाओं के लिए शौचालय निर्माण में अग्रणी रहा है। मुख्यमंत्री की अपेक्षा के अनुरूप हर साल ‘स्कूल चलें हम’ अभियान संचालित किया जा रहा है। जन-सहभागिता से स्कूलों की अधोसंरचना को सुदृढ़ किया जा रहा है। हाल के वर्षों में 25 हजार शिक्षक को पदोन्नति दी गई है। पारदर्शिता से 799 शिक्षक की ऑनलाइन पोस्टिंग की गई है। श्री जैन ने शिक्षकों से कहा कि जो जहाँ कार्यरत है वहाँ शिक्षा के स्तर को आगे बढ़ाये।

श्री पारस जैन ने 7 शिक्षक को राज्य स्तरीय तथा गत वर्ष राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त 13 शिक्षक को प्रशस्ति-पत्र, शाल, श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया। श्री जैन ने राज्य स्तरीय पुरस्कार में 25-25 हजार की राशि भेंट की। उन्होंने शिक्षक संगोष्ठी में प्रथम रहे शिक्षक श्रीमती शालिनी दुबे (धार) और श्री आर.के. अग्निहोत्री (सागर) करे 25-25 हजार तथा प्रशस्ति-पत्र, शाल, श्रीफल से पुरस्कृत किया। पिछले दिनों अपहृत एक छात्र श्री निशांत झोपे के जंगल में मिलने और उसे पुलिस तथा अभिभावक को सौंपने के लिए शिक्षक श्री मोहन सिंह इवने को भी सम्मानित किया गया।

श्री ज्ञान सिंह ने कहा कि युगों से वेद-पुराण में गुरु की महिमा का वर्णन मिलता रहा है। मध्यप्रदेश में पहली बार अनुसूचित जाति-जनजाति के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के साथ ही विदेश में अध्ययन के लिए अवसर उपलब्ध करवाये जा रहे हैं। आई.ए.एस., आई.पी.एस. सहित पी.एस.सी. की परीक्षा के लिए भी कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को प्रशिक्षण आदि की सुविधा देकर दक्ष बनाया जा रहा है। उन्होंने शिक्षक और विद्यार्थियों से गुरु-शिष्य की गौरवशाली परम्परा को आगे भी कायम रखने का अनुरोध किया। श्री दीपक जोशी ने कहा कि समाज को एक अच्छा इंजीनियर, डॉक्टर शिक्षक ही दे सकता है। उन्होंने शिक्षक को समाज में बदलाव का संवाहक बताया तथा कहा कि शिक्षक के महत्व और पहचान को बनाये रखने में सभी को प्रयास करने होंगे। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की भी इच्छा है कि गुरु का गौरव और सम्मान पुन: स्थापित हो। श्री पी.सी.मीना ने शिक्षकों को शिक्षक दिवस पर बधाई दी।

एम-शिक्षा मित्र एप की जानकारी देते हुए श्री डी. डी .अग्रवाल ने कहा कि शिक्षक की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए इंदौर संभाग में शुरू हुई मोबाइल अटेंडेंस योजना को विस्तारित एवं सुविधाजनक बनाते हुए इसे लांच किया जा रहा है। एप को एन.आई.सी. ने नि:शुल्क तैयार किया है। अटेंडेंस के साथ-साथ यह शिक्षकों के लिए बहुउपयोगी है। शिक्षक इसके द्वारा नि:शुल्क एस.एम.एस. से अपनी समस्या बताकर उसके निराकरण की जानकारी ले सकेंगे। एप्लीकेशन में एस.एम.एस. के जरिए ही सामान्य भविष्य निधि, अवकाश की सूचना, उपस्थिति या अनुपस्थिति की जानकारी, नि:शक्त बच्चों एवं छात्रवृत्ति आदि की जानकारी के लिए फीचर रहेंगें। मोबाइल एप में 200 एस.एम.एस. नि:शुल्क किये जा सकेंगें। अपने मित्र को जन्म दिवस की शुभकामनाएँ भेजने के लिए ‘बर्थ-डे रिमाइंडर’ का फीचर भी रहेगा। एप को मोबाइल में डाउन लोड करने के बाद ये सुविधाएँ शुरू होंगी। भविष्य में 10-15 सुविधाएँ और शुरू हो जायेगी।

प्रारंभ में श्री पारस जैन और अतिथियों ने माँ सरस्वती एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण किया। शासकीय कमला नेहरू कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की छात्राओं ने सरस्वती वंदना, वंदे-मातरम् और मध्यप्रदेश गान गाया। स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से अतिथियों को स्मृति-चिन्ह भेंट किये गये।

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