स्‍वाइन फ्लू से घबराने की जरूरत नहीं

भोपाल, फरवरी 2015/ स्वाइन फ्लू से घबराने की जरूरत नहीं है। प्रदेश के समस्त जिला चिकित्सालयों में स्वाइन फ्लू के इलाज की पर्याप्त व्यवस्था है। आवश्यक चिकित्सक तथा दवाएँ उपलब्ध हैं। बीमारी के लक्षण पता लगते ही मरीज को अस्पताल लाने पर तीन दिन के भीतर तबियत में सुधार आ जाता है।

यह जानकारी यहाँ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा की गयी समीक्षा में दी गयी। बैठक में निजी चिकित्सालयों को इलाज में नैतिकता बरतने की नसीहत दी गयी। बैठक में मुख्य सचिव अन्टोनी डि सा भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीमारी से बचाव, नियंत्रण तथा इलाज के सभी जरूरी कदम उठायें। बीमारी के बारे में समाज में जाग्रति के प्रयास किये जायें।

लक्षण

बैठक में प्रमुख सचिव स्वास्थ्य प्रवीर कृष्ण ने बताया कि सर्दी, खाँसी के साथ बुखार और गले में खराबी होना, श्वांस लेने में तकलीफ आदि स्वाइन फ्लू के लक्षण हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर मरीज को तत्काल नजदीकी जिला चिकित्सालय ले जाना चाहिये। जल्द इलाज शुरू होने पर मरीज बिल्कुल ठीक हो जाते हैं। शासकीय अस्पतालों में एच-वन एन-वन स्वाइन फ्लू जाँच तथा उपचार की नि:शुल्क सुविधा है। मरीज में स्वाइन फ्लू के लक्षण पाये जाने पर एच-वन एन-वन की जाँच के सेम्पल ग्वालियर अथवा जबलपुर भेजे जाते हैं। वहाँ से 24 घंटे में रिपोर्ट आ जाती है। अभी लगभग 50 सेम्पल प्रतिदिन जाँच के लिये भेजे जा रहे हैं। इस बीमारी के मरीज दस-बारह अन्य राज्य में भी पाये गये हैं। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी बीमारी की रोकथाम तथा इलाज के विभिन्न राज्यों में किये जा रहे प्रयासों की समीक्षा की थी। इसमें मध्यप्रदेश द्वारा किये जा रहे प्रयासों पर संतुष्टि व्यक्त की गयी थी। बताया गया कि मौसम में गर्मी शुरू होने पर इस बीमारी के कीटाणु नष्ट हो जायेंगे। मध्यप्रदेश में बीमारी के प्रकोप जैसी कहीं स्थिति नहीं है।

इलाज एवं बचाव

स्वाइन फ्लू के मरीज को चिकित्सकों द्वारा टेमी फ्लू टेबलेट दी जाती है। प्रदेश के सभी जिला चिकित्सालयों में यह दवा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। शासकीय अस्पतालों में स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिये आइसोलेटेड वार्ड बनाये गये हैं। बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर कुछ सावधानियाँ बरतने की जरूरत होती है। मरीज को खाँसी आने पर रूमाल या तौलिया से मुँह ढँक लेना चाहिये। आँख, नाक और मुँह को छूने से पहले हाथों को साबुन से धोना चाहिये। मरीज से हाथ मिलाने और गले मिलने से बचना चाहिये। भीड़भाड़ से बचना चाहिये। घर में सफाई पर ध्यान देना चाहिये। साधारण लक्षण वाले मरीजों को घर पर विश्राम करना चाहिये। बच्चों को सर्दी, खाँसी होने पर स्कूल नहीं भेजें। सबसे जरूरी है कि उपचार में शीघ्रता बरतना चाहिये। विलम्ब होने पर उपचार कठिन हो जाता है।

भोपाल में इलाज व्यवस्था

बताया गया कि भोपाल स्थित जे.पी. अस्पताल, गैस राहत के चारों अस्पताल, काटजू अस्पताल, बैरागढ़ स्थित शासकीय अस्पताल में स्वाइन फ्लू के इलाज, परीक्षण, मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था है। मेडिकल कॉलेज स्थित अस्पताल में इलाज और जाँच की सुविधा के साथ विशेष रूप से प्रभावित मरीजों के इलाज की व्यवस्था की गयी है।

बताया गया कि केवल शासकीय चिकित्सालयों में ही स्वाइन फ्लू के परीक्षण की व्यवस्था और दवाएँ उपलब्ध हैं। ऐसे में कहीं अन्य जगह जाकर समय और पैसा लगाने के बजाय सीधे शासकीय अस्पतालों में मरीज को पहुँचाना चाहिये। कुछ निजी चिकित्सालय मर्ज बिगड़ने पर मरीज को शासकीय चिकित्सालय भेज देते हैं। ऐसी स्थिति पाये जाने पर संबंधित निजी चिकित्सालय का पंजीयन निरस्त करने की कार्रवाई की जायेगी।

जानकारी दी गयी कि स्वाइन फ्लू एक वायरस है जो पक्षियों तथा सुअरों में पाया जाता है। इस वायरस के मिश्रण से नया वायरस बनता है जो मनुष्यों को प्रभावित करता है। यह भी बताया गया कि निजी चिकित्सालयों के चिकित्सकों को भी बीमारी के इलाज का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बैठक में स्वास्थ्य आयुक्त पंकज अग्रवाल भी उपस्थित थे।

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