एक अच्‍छी कविता ‘कसम से’

कसम से
*********
बुरी कोढ़ में खाज कसम से
जैसे जाकिट राज कसम से
*
बात-बात में लुट जाती है
राजनीति में लाज,कसम से
*
कुर्सी की बीमारी घातक
इसका नहीं इलाज,कसम से
*
काट रहा है कोई निर्मम
अपनी,सबकी प्याज कसम से
*
अगर न बदली हवा दुबारा
छिन जाएगा ताज,कसम से
*
अंजामों की फ़िक्र न कीजै
करिये तो आगाज,कसम से
*
हो महान डंका वादक तुम
क्यों न करें हम नाज,कसम से
*
लोकतंत्र का असली वारिस
होगा टल्लेबाज कसम से
*
@ राकेश अचल की फेसबुुुक वाॅॅल से साभार

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here