‘बाबा चैनल’ के प्रेमियों के लिए शानदार कविता

प्रवचन

यह अचानक नहीं होता

कि कानों में पड़ रहे प्रवचन के स्वर

मन को दिलासा देने लगते हैं

दिखाई देने लगते हैं

मोक्ष शब्द के विलुप्त अर्थ

मंत्रों के नाद

केवल कानों से नहीं टकराते

मन की कमज़ोर परतों पर प्रहार करते हैं

चाशनी में लिपटी आवाज

आपकी पलकों पर अटके

आँसुओं को पहचान लेती है

हौले हौले सर थपथपाती है

गुम हो जाती है वह ताकत

जो किसी नाज़ुक पल में भी

आपको भाग्य के भरोसे नहीं छोड़ती थी

दीमकें भीतर ही भीतर

खोखला कर देती हैं विश्वास

ऐसे में सुबह सुबह टी.वी. पर

शुरु होता है

एक ‘हॉरर शो’

और उसके प्रसारण से पूर्व

कोई वैधानिक चेतावनी नहीं दी जाती।

– शरद कोकास 

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