प्रतिवाद और प्रतिरोध मेंं खड़ी कविताएं- संदर्भ ढाका हमला

यह सामग्री हमने सीपीएम की मध्‍यप्रदेश इकाई के सचिव बादल सरोज की फेसबुक वॉल से ज्‍यों की त्‍यों उठा ली है। आप तक पहुंचाने के लिए…

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(कुछ नहीं कहना, जो कहा जाना है मनमोहन, शुभा, सरला जी की कविताएं कहेंगी।)
Idea courtesy: सुधीर सिंह !!

● मनमोहन

।।हम तुम्हें मार देंगे ।।

भूखा मार देंगे
या खिला-खिला के मार देंगे
हम तुम्हें मार देंगे

दूर रखकर
या पास बुलाकर
सामने से
या पीछे से
अकेला करके
या किसी क़बीले में खड़ा करके

बटन दबा कर
या किसी क़रार पर दस्तख़त करके
हम तुम्हें मार देंगे

ज़‍िन्दा जला कर मार देंगे
फूलों से दबा कर मार देंगे
हम तुम्हें अमर कर देंगे
और इस तरह तुम्हें मार देंगे

हम तुम्हें मार देंगे
और जीवित रखेंगे

एक दिन तुम
पड़ौसी के मर जाने से ईर्ष्या करोगे
और अपने बचे रहने पर शर्म करोगे
तुम कहोगे कि मैं जल्द से जल्द मरना चाहता हूं
और हम कहेंगे कि जल्दी क्या है .

● शुभा

। । आदमखोर 1 । ।

एक स्त्री बात करने की कोशिश कर रही है
तुम उसका चेहरा अलग कर देते हो धड़ से
तुम उसकी छातियां अलग कर देते हो
तुम उसकी जांघें अलग कर देते हो

तुम एकांत में करते हो आहार
आदमखोर! तुम इसे हिंसा नहीं मानते

। । आदमखोर 2 । ।

आदमखोर उठा लेता है
छह साल की बच्ची
लहूलुहान कर देता है उसे

अपना लिंग पोंछता है
और घर पहुँच जाता है
मुँह हाथ धोता है और
खाना खाता है

रहता है बिल्कुल शरीफ़ आदमी की तरह
शरीफ़ आदमियों को भी लगता है
बिल्कुल शरीफ़ आदमी की तरह।

● सरला माहेश्वरी

।। सेक्युलर जवाब । ।

फ़राज़ भागा नहीं
दोस्तों के साथ रहा
यह था धर्म को उसका सेक्यूलर जवाब

फ़राज़ डिगा नहीं
पढ़ी नहीं आयतें
यह था मज़हबी दरिंदों को उसका सेक्यूलर जवाब

फ़राज़ डरा नहीं
क़ुरान की शरण से इंकार किया
यह था आस्थावादी आतंक को उसका सेक्यूलर जवाब

फ़राज़ हारा नहीं
नहीं गया किसी इबादत की शरण
यह था पैग़म्बर के दूतों को उसका सेक्यूलर पैग़ाम

फ़राज़ ज़िंदा है
मर कर भी ज़िंदा है
यह है मौत को जिंदगी का सेक्यूलर जवाब

फ़राज़ अमर है
अमर रहेगा
यह है धर्म के ठेकेदारों को हमारा सेक्यूलर जवाब

धर्म हमसे है
हम धर्म से नहीं
यह है हत्यारे धर्मों को मनुष्यों का सेक्यूलर जवाब

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