कबीर मानवता के प्रतिनिधि स्‍वर हैं

नई दिल्‍ली/ भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र द्वारा 17 जून को ‘कबीर जयंती’ प्रसंग में निर्गुण भक्ति धारा की ज्ञानमार्गीय शाखा के प्रमुख संत, महाकवि कबीर के वैचारिक दर्शन पर विमर्श आयोजित किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार व पूर्व प्राचार्य उच्च शिक्षा विभाग मध्‍यप्रदेश डॉ. प्रकाश उपाध्याय ने ‘मानवीय मूल्यों के प्रखर प्रवक्ता कबीर’ विषय पर विचार व्‍यक्‍त करते हुए, कबीर की विविध उक्तियों के माध्‍यम से उनके दर्शन में मानवीय मूल्यों की विस्तृत विवेचना की ।

डॉ. उपाध्याय ने कहा कि कबीर की कविता ‘आँखों देखी सच्चाई’  है, पोथियों के पन्नों में लिखी हुई बात नहीं। वे मूल्य जो मनुष्यता की परिभाषा तय करते हैं, कबीर के दर्शन में व्यावहारिक रूप में उपलब्ध हैं। कबीर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उन्होंने जिन जिन मूल्यों और ऊसूलों की बात की उन्हें सर्वप्रथम स्वयं के आचरण में उतारा, यही कारण है कि उनकी कथनी और करनी में कोई फर्क नहीं दिखाई देता। कबीर कालजयी कवि हैं, वे कल भी प्रासंगिक थे, आज भी हैं और आने वाले समय में भी रहेंगे ।

डॉ. उपाध्याय ने कबीर को शील, सादगी और साधुता की त्रिवेणी निरूपित किया। उन्होंने बताया कि कबीर का स्वर मानवता का प्रतिनिधि स्वर है। वे मानवीय मूल्यों के प्रखर प्रवक्ता हैं। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मानवीय मूल्यों को स्‍थापित करने के लिए समर्पित कर दिया ।

कार्यक्रम में इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र नई दिल्ली के सदस्य सचिव डाँ सच्चिदानंद जोशी, विभागाध्यक्ष, जनपद संपदा- प्रोफेसर मौली कौशल, वरिष्ठ पत्रकार उमेश उपाध्याय सहित मीडिया जगत से जुड़े अनेक पत्रकार व बड़ी संख्या में प्रबुद्ध श्रोता उपस्थित थे। आभार अभय मिश्रा ने ज्ञापित किया।

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