आज की कविता- दुनिया रंग बिरंगी बाबा

दुनिया रंग बिरंगी बाबा

दुनिया रंग बिरंगी बाबा
दुनिया रंग बिरंगी
वो संगी, मैं जंगी बाबा
दुनिया रंग बिरंगी
*
तेरे हाथ में सत्ता बाबा
मेरे हाथ में सत्तू
तू खाता है माल सदा से
मैं खाता हूँ बत्तू
*
जंग लगी मेरी फटफटिया
तेरी कार है जंगी बाबा
दुनिया रंग बिरंगी
*
ठाठ बाट तेरे हिस्से में
टूटी खाट हमारी
संसाधन पर तेरा कब्जा
नर हो चाहे नारी
*
सजी धजी है प्रतिमा तेरी
हम सबकी है नंगी बाबा
दुनिया रंग बिरंगी बाबा
दुनिया रंग बिरंगी
*
@ राकेश अचल की फेसबुक वॉल से साभार

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