तीसरी बकरी आखिर कहां गई?

पांचवी क्लास में दो विद्यार्थी थे।

एक दिन स्कूल की छुट्टी के बाद एक ने दूसरे से कहा- “दोस्त, मेरे दिमाग में एक आईडिया है!”

“बताओ-बताओ… क्या आईडिया है?” दूसरे ने एक्साइटेड होते हुए पूछा।

“वो देखो, सामने तीन बकरियां चर रही हैं।”

“तो! इनसे हमें क्या लेना-देना है?”

“हम आज सबसे अंत में स्कूल से निकलेंगे और जाने से पहले इन बकरियों को पकड़ कर स्कूल में छोड़ देंगे, कल जब स्कूल खुलेगा तब सभी इन्हें खोजने में अपना समय बरबाद करेगे और हमें पढ़ाई नहीं करनी पड़ेगी..”

“पर इतनी बड़ी बकरियां खोजना कोई कठिन काम थोड़े ही है? कुछ ही समय में ये मिल जाएंगी और फिर सब कुछ नार्मल हो जाएगा..”

“हा..हा..हा.. यही तो बात है, वे बकरियां आसानी से नहीं ढूंढ पाएंगे, बस तुम देखते जाओ मैं क्या करता हूँ!”

इसके बाद दोनों दोस्त छुट्टी के बाद भी पढ़ाई के बहाने क्लास में ही बैठे रहे। जब सभी लोग चले गए तो ये तीनों बकरियों को पकड़ कर क्लास के अन्दर ले आए।

अन्दर लाकर दोनों ने बकरियों की पीठ पर काले रंग का गोला बना दिया। इसके बाद एक बोला, “अब मैं इन बकरियों पे नंबर डाल देता हूँ। और उसने सफेद रंग से नंबर लिखने शुरू किये:

पहली बकरी पर नंबर 1,

दूसरी पर नंबर 2,

और तीसरी पर नंबर 4.

“ये क्या? तुमने तीसरी बकरी पर नंबर 4 क्यों डाल दिया?” पहले वाले ने आश्चर्य से पूछा।

दूसरा हंसते हुए बोला, “दोस्त यही तो मेरा आईडिया है, अब कल देखना सभी तीसरे नंबर की बकरी ढूँढने में पूरा दिन निकाल देंगे.. और वो कभी मिलेगी ही नहीं..”

अगले दिन दोनों दोस्त समय से कुछ पहले ही स्कूल पहुँच गए।

थोड़ी ही देर में स्कूल के अन्दर बकरियों के होने का शोर मच गया।

कोई चिल्ला रहा था, “चार बकरियां हैं, पहले, दूसरे और चौथे नंबर की बकरियां तो आसानी से मिल गईं.. बस तीसरे नंबर वाली को ढूँढना बाकी है।”

स्कूल का सारा स्टाफ तीसरे नंबर की बकरी ढूंढने में लग गया.. एक-एक क्लास में टीचर गए, अच्छे से तालाशी ली। कुछ खोजवीर स्कूल की छत पर भी बकरी ढूंढते देखे गए.. कई सीनियर बच्चों को भी इस काम में लगा दिया गया।

तीसरी बकरी ढूँढने का बहुत प्रयास किया गया, पर बकरी तो तब मिलती जब वो कहीं होती..! बकरी तो थी ही नहीं!

बाकी सब परेशान थे पर दोनों दोस्‍त इतने खुश पहले कभी नहीं हुए थे। आज उन्होंने अपनी चालाकी से एक बकरी अदृश्य कर दी थी।

इस कहानी को पढ़कर चेहरे पर हलकी सी मुस्कान आना स्वाभाविक है। पर इस मुस्कान के साथ-साथ, हमें इसमें छिपे सन्देश को भी ज़रूर समझना चाहिए…।

तीसरी बकरी, *दरअसल वो चीज है जिसे खोजने के लिए हम बेचैन हैं पर वो हमें कभी मिलती ही नहीं.. क्योंकि वो वास्तव में है ही नहीं*!

सवाल- यदि वह तीसरी बकरी होती भी, तो आप उसे क्‍या नाम देते ….? 

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एक फेसबुक मित्र की वॉल से साभार 

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