अतिथि विद्वान रखने के नवीन दिशा-निर्देश जारी

भोपाल, अगस्त 2014/ शासकीय महाविद्यालयों में रिक्त प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, ग्रंथपाल, क्रीड़ा अधिकारी और संस्कृत महाविद्यालयों में अराजपत्रित संवर्ग के शिक्षकों के पद के विरुद्ध अतिथि विद्वान रखने के निर्देश उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी किये गये हैं। अतिथि विद्वानों का चयन अधिकतम 11 माह के लिये किया जायेगा। हर सेमेस्टर के बाद उन्हें 15 दिवस का ब्रेक दिया जायेगा। अतिथि विद्वानों द्वारा किये गये कार्य का लाभ भविष्य में दिये जाने के लिये 11 माह को एक शिक्षण सत्र माना जायेगा।

अतिथि विद्वानों के लिये विषयवार एवं महाविद्यालयवार स्थानों के लिये ऑनलाइन आवेदन प्राप्त किये जायेंगे। प्रत्येक आवेदक द्वारा अधिकतम 10 महाविद्यालय के नाम वरीयताक्रम में दिये जायेंगे। चयन प्रक्रिया पूर्णत: मेरिट के आधार पर होगी। पीएच.डी तथा नेट/सेट परीक्षा उत्तीर्ण होने पर 40, एम. फिल. तथा नेट/सेट परीक्षा उत्तीर्ण होने पर 30, केवल नेट/सेट परीक्षा उत्तीर्ण होने अथवा केवल पी-एच.डी करने पर 20 और केवल एम. फिल. उपाधि धारक को 10 मेरिट अंक दिये जायेंगे। इनमें से किसी एक श्रेणी को ही अधिभार के रूप में चुना जा सकता है। अंतिम मेरिट सूची स्नातकोत्तर-स्तर पर प्राप्तांकों के प्रतिशत के साथ अन्य अधिभारों के अंकों को जोड़ते हुए बनाई जायेगी।

सहायक प्राध्यापक को 200 रुपये प्रति पीरियड अधिकतम 600 रुपये प्रति काल-दिवस दिये जायेंगे। इसी तरह ग्रंथपाल और क्रीड़ा अधिकारी को 580, संस्कृति/संगीत महाविद्यालय के व्याख्याता/शिक्षक को 390, संस्कृत शिक्षक-प्रशिक्षक स्नातक को 290 और सहायक व्याख्याता/ संस्कृत शिक्षक को 200 रुपये प्रति काल-दिवस का मानदेय मिलेगा। अतिथि विद्वान द्वारा किये गये पठन-पाठन कार्य का मूल्यांकन संबंधित छात्रों द्वारा भी करवाया जायेगा। विस्तृत जानकारी उच्च शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर देखी जा सकती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here