अनिवार्य शिक्षा के लिए मानिटरिंग सेल गठित होगा

भोपाल, फरवरी 2013/ बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती ऊषा चतुर्वेदी ने कहा है कि निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा बच्चों का मौलिक अधिकार है। बाल अधिकार संरक्षण आयोग राज्य में उनके इस अधिकार के परिपालन में सजग प्रहरी की भूमिका का निर्वहन करेगा। श्रीमती चतुर्वेदी यहाँ निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रही थी। उन्होंने कहा कि आयोग में अधिनियम के क्रियान्वयन की मानिटरिंग के लिये अलग से एक सेल गठित किया जायेगा। अन्य देशों की तुलना में भारत में सर्वाधिक बच्चे हैं। संविधान के मौलिक अधिकारों में बच्चों के हित संरक्षण का विशेष प्रावधान है। वर्ष 2009 में बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम द्वारा इसमें संशोधन कर निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार का प्रावधान किया गया। इसके निरीक्षण की जवाबदारी बाल अधिकार संरक्षण आयोग पर है।

प्रमुख सचिव महिला-बाल विकास बी.आर. नायडू ने कहा कि अच्छे प्रयास ही भविष्य की दिशा तय करने में मदद करेंगे। आयुक्त आदिवासी विकास आशीष उपाध्याय ने कहा कि अनुशासन के नाम पर शिक्षकों एवं बच्चों में जो भय है उसे भी दूर करने की दिशा में हमें प्रयास करने होंगे। आयुक्त राज्य शिक्षा केन्द्र श्रीमती रश्मि अरूण शमी ने बताया कि प्रदेश में अब लगभग सभी शालाओं के अपने भवन हैं। शालाओं में पीने का स्वच्छ पानी और शौचालयों की समस्या अगले छह माह में दूर कर ली जायेगी। राज्य शिक्षा केन्द्र सलाहकार एल.एस.बघेल ने बताया कि अब स्कूलों के लिये शासकीय मान्यता अनिवार्य है।

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