अब सैलानियों की पसंद बनता अपना मध्यप्रदेश

अपनी बेजोड़ ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर वन-संपदा और प्राकृतिक सुंदरता के कारण मध्यप्रदेश अब देश के पर्यटन नक्शे पर तेजी से उभर रहा है। राज्य सरकार द्वारा की गई कोशिशों के चलते प्रदेश में पर्यटन उद्योग तेजी से फलने-फूलने लगा है और देश का ह्रदय-स्थल सैलानियों की पसंद बनता जा रहा है। राज्य सरकार की पर्यटन नीति के प्रभावी क्रियान्वयन तथा अभिनव प्रयोगों को जाता है।

मध्यप्रदेश में दृढ़ इच्छा-शक्ति से किये जा रहे प्रयासों के बेहतर परिणाम दिखना शुरू हो गये हैं। पर्यटन विकास के लिये सबसे पहले अधोसंरचना विकास को एजेंडा में लिया गया। प्रदेश में पर्यटन सुविधाओं में न केवल वृद्धि की गई, बल्कि व्यावसायिक और तकनीकी दृष्टिकोण के जरिये वित्तीय और प्रशासनिक अनुशासन लागू किया जाकर प्रभावी परिणाम प्राप्त किये जा रहे हैं। यही कारण है कि पर्यटकों की संख्या में पिछले वर्षों के दौरान काफी बढ़ोत्तरी हुई है।

अब से 8-9 वर्ष पहले अगर मध्यप्रदेश भारत और विश्व के पर्यटन नक्शे पर न उभर पाया था, तो यह एक बड़ी विडंबना रही थी। केरल, गोवा और राजस्थान पर्यटन के मामले में देश के सबसे अग्रणी प्रदेश हैं, लेकिन इनमें मध्यप्रदेश जैसी विविधता और बहुरंगता नहीं है। इसके बावजूद इन दोनों प्रदेशों की अर्थ-व्यवस्था का मुख्य आधार पर्यटन बना हुआ है। मध्यप्रदेश सरकार ने पिछले 9 वर्ष में इस विडंबना को दूर कर प्रदेश को पर्यटन के नक्शे पर प्रमुखता से रखने के लिये प्रतिबद्ध प्रयास किये। इन प्रयासों के फलस्वरूप आज मध्यप्रदेश पर्यटन के क्षेत्र में सैलानियों में अपनी पहचान बना रहा है।

पर्यटन नीति

‘‘पर्यटन नीति-2010’’ बनाई गई है। प्रदेश में उपलब्ध शासकीय भूमियों को पर्यटन गतिविधियों के लिए आरक्षित किया जाकर लैण्ड बैंक स्थापित किया गया है। बैंक में 455 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध है। निजी निवेशकों को पर्यटन अधोसंरचना विकसित किये जाने के लिये भूमियाँ लीज/विकास अनुबंध के आधार पर उपलब्ध करवाई जा रही है। पर्यटन विभाग द्वारा केरेवॉन टूरिज्म, वॉटर टूरिज्म तथा विरासतीय भवनों को हेरीटेज होटल के रूप में संचालित किये जाने को प्राथमिकता पर रखा गया है। पर्यटन नीति में निवेशकों के लिये विशेष रियायतों एवं छूट के प्रावधान रखे गये हैं, जिनमें हॉस्पिटेलिटी सेक्टर में प्रभावी विभिन्न करों में पाँच से दस वर्ष की छूट, स्टाम्प ड्यटी की प्रतिपूर्ति, लैण्ड डायवर्सन की सुविधा आदि प्रमुख हैं।

एयर कनेक्टिविटी

पर्यटकों को सहज एवं द्रुतगामी आवागमन उपलब्ध हो सके, इसे दृष्टिगत रखते हुए निजी क्षेत्र के माध्यम से पहले चार प्रमुख नगरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर एवं जबलपुर को और बाद में खजुराहो एवं रीवा को भी हवाई सेवाओं से जोड़ा गया। शीघ्र ही कान्हा, बाँधवगढ़, पचमढ़ी, सतना के लिये भी ये सेवाएँ उपलब्ध हों, ऐसे प्रयास किये जा रहे हैं। निजी सेवाओं को प्रोत्साहित करने के लिये विभाग द्वारा किये गये अनुबंध में 3 सीटें अण्डरराईट किये जाने तथा ईंधन पर वेट टैक्स की प्रतिपूर्ति तीन साल तक किये जाने का प्रावधान रखा गया है।

मार्केटिंग

प्रदेश के बाहर मार्केटिंग एवं पर्यटकों का आरक्षण एवं पर्यटन-स्थलों की जानकारी देने के लिये दिल्ली, कोलकाता, मुम्बई, नागपुर, हैदराबाद, अहमदाबाद, लखनऊ, पुणे एवं रायपुर में मार्केटिंग कार्यालय संचालित किये जा रहे हैं। हाल ही में बनारस तथा सरत में मार्केटिंग कार्यालय खोला गया है। वर्ष 2011 में कुल 4 करोड़ 20 लाख 06 हजार 140 पर्यटक का आगमन हुआ। पर्यटक संख्या में इस वृद्धि की सराहना भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा की जाकर प्रदेश को गत 3-4 वर्ष से निरंतर पुरस्कृत किया जा रहा है। विदेशी पर्यटकों की वृद्धि के लिये जर्मन, फ्रेंच एवं रोमन आदि विदेशी पत्र-पत्रिकाओं में विज्ञापन दिये जाकर विदेशों में रोड-शोज का आयोजन किया गया।

कॉरवान क्षेत्र

पर्यटन निगम द्वारा संचालित कॉरवान पर्यटन सुविधा को काफी सराहा गया है। यह पहला प्रदेश है जिसके द्वारा यह सुविधा संचालित की जा रही है। भारत सरकार, पर्यटन मंत्रालय द्वारा इसके लिये प्रदेश को पुरस्कृत भी किया गया है। निजी क्षेत्र के सहयोग से भी सुविधायुक्त कॉरवान चलाने हेतु अभिरुचि आमंत्रित हैं।

वॉटर टूरिज्म

प्रदेश में स्थित विशाल जलाशयों का पर्यटन के क्षेत्र में भरपूर उपयोग किया जाकर पर्यटकों को नये पर्यटन आकर्षण उपलब्ध करवाने के दृष्टिकोण से राज्य सरकार ने विभिन्न जलाशयों में पर्यटन संबंधी गतिविधियों के विकास की नीति बनाई है। वर्तमान में इंदिरा सागर डेम पर निजी क्षेत्र के माध्यम से अधोसंरचना विकसित करने की कार्यवाही अंतिम चरण में है। तवा-मढ़ई-तवा, बरगी एवं अपर लेक, भोपाल में क्रूज का संचालन किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त ओंकारेश्वर, सैलानी आईलैण्ड पर जल-क्रीड़ा एवं रिसोर्ट तथा तवा में हाउस-बोट सुविधाएँ, चोरल, जोगाकिलो जिला हरदा में जल-क्रीड़ा सुविधाएँ विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।

मार्ग सुविधाएँ

पर्यटकों को प्रदेश के पर्यटक-स्थलों के लिए सड़क मार्ग से आवागमन में निरंतर वृद्धि अपेक्षित है। इसे दृष्टिगत रखते हुए प्रदेश के राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर क्रमशः प्रत्येक 50 एवं 40 किलोमीटर पर मार्ग सुविधाएँ विकसित करने की योजना बनाई जाकर 268 स्थल चिन्हांकित किये गये है। कई प्रमुख मार्गों पर मार्ग सुविधाओं का निर्माण प्रारंभ किया जा चुका है।

प्रशिक्षण

प्रदेश पर्यटन क्षेत्र में कार्यरत सेवा प्रदाताओं द्वारा पर्यटकों को बेहतर गुणवत्ता एवं व्यवहार के साथ सुविधाएँ उपलब्ध करायी जा सकें, इसके लिये भोपाल में हॉस्पिटेलिटी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना की गयी है। इसके माध्यम से ढाबों/होटलों में कार्यरत कर्मचारियों, गाईड्स, कुली, टैक्सी-रिक्शा चालकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इंदौर में राज्य होटल प्रबंध संस्थान स्थापित किया जा रहा है। संस्थान का निर्माण जून, 2012 तक पूर्ण हो जायेगा। इसके अतिरिक्त जबलपुर एवं रीवा में फूड-क्राफ्ट इंस्टीट्यूट खोले जाने की योजना है। भारत सरकार की हुनर-से-रोजगार कार्यक्रम योजना संचालित की जा रही है। वर्तमान तक विभाग द्वारा भोपाल में संचालित संस्थान के माध्यम से हॉस्पिटेलिटी के क्षेत्र में 1146 युवाओं को तथा हुनर से रोजगार के अंतर्गत 172 युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है। विभाग द्वारा प्रशिक्षित 1146 युवाओं में से 868 युवाओं को रोजगार उपलब्ध हुए हैं।

लेसर नोन डेस्टिनेशन्स

प्रदेश में पर्यटकों की संख्या में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है। पर्यटकों के प्रदेश में रात्रि विश्राम की अवधि में वृद्धि के उद्देश्य से, इसके लिये प्रमुख पर्यटन केन्द्रों के समीप स्थित अन्य ऐसे पर्यटन आकर्षण जो महत्वपूर्ण तो हैं, लेकिन उनके बारे में पर्यटकों को अधिक जानकारी नहीं होने के कारण वे इन स्थलों पर नहीं जा पाते हैं, का सर्वेक्षण कर एक पुस्तक का प्रकाशन किया गया है। यह निगम के सभी मार्केटिंग/सूचना/निगम के सभी कार्यालयों/होटलों में पर्यटकों को उपलब्ध करवायी जा रही है।

पर्यटक सुविधाओं में वृद्धि

पर्यटन निगम द्वारा संचालित होटल/मोटल इकाइयों का पर्यटकों की अपेक्षाओं के अनुरूप उन्नयन करते हुए पर्यटक सुविधाओं में वृद्धि की जाकर स्वीमिंग-पूल, कान्फ्रेंस-हॉल, क्लब आदि तैयार किये जा रहे हैं। पर्यटन निगम के 11 होटलों को 3 सितारा श्रेणी/हेरिटेज श्रेणी प्राप्त है। जो देश के किसी भी अन्य प्रदेश के पर्यटन निगम से कहीं ज्यादा है। निगम की 12 इकाइयों, कार्यालयों, बोट क्लब्स को आई.एस.ओ. प्रमाण-पत्र प्राप्त है। पर्यटकों के मनोरंजन के लिये भोपाल में सैर-सपाटा की स्थापना की जाकर संचालित की गई है। निगम द्वारा ग्वालियर, ओरछा एवं खजुराहो में ध्वनि एवं प्रकाश कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं। इसके साथ ही साँची, भोपाल, उज्जैन, इंदौर तथा माण्डू में भी कार्यवाही प्रचलन में है।

अभिनव योजनाएँ/जन-निजी-भागीदारी योजनाएँ

  • पवन-हंस के सहयोग से हेलीकाप्टर सेवाओं के प्रारंभ के प्रस्ताव।

  • जन-निजी भागीदारी (पी.पी.पी.) के अंतर्गत इंदिरा सागर जलाशय मंदसौर में रिसॉर्ट और साहसिक पर्यटन गतिविधियों के लिये तथा राजगढ़ पैलेस दतिया को हेरिटेज होटल में बदलने की कार्यवाही प्रचलन में है।

  • जबलपुर एवं ग्वालियर में कन्वेंशन सेंटर, 3-5 सितारा होटल, माण्डू एवं साँची में रिसॉर्ट तथा गाँधी सागर जलाशय में रिसॉर्ट, साहसिक पर्यटन गतिविधियों की परियोजनाओं के संबंध में की कार्यवाही के प्रचलन में है।

  • बाणसागर रीवा के लिये निजी निविदाकार से अनुबंध की कार्यवाही प्रचलित। सागर, करेरा, तेंदूखेड़ा, धार एवं तामिया को निजी अनुबंध पर देने के लिये निविदा बुलाने हेतु कार्यवाही प्रस्तावित।

  • परिवहन क्षेत्र में निजी क्षेत्र के सहयोग से सुविधायुक्त बसें चलाने हेतु 10 मार्ग के लिये अभिरुचि प्रस्ताव आमंत्रित।

  • पर्यटन संबंधी गतिविधियों के विकास के उद्देश्य से लैण्ड बैंक के अंतर्गत 455 हेक्टेयर भूमि की पहचान की गई।

  • लोक निर्माण विभाग के पचमढ़ी स्थित देवदारू, कर्णिकार, क्लब व्यू विश्राम गृह एवं श्योपुर कलाँ स्थित कूनो पालपुर विश्रामगृह, पर्यटन संबंधी गतिविधियों के लिये पर्यटन विभाग को हस्तांतरित।

  • प्रदेश में पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने हेतु 1 एवं 2 फरवरी, 2012 को खजुराहो समिट का आयोजन।

  • फिल्म टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिये प्रदेश के पर्यटन आकर्षणों पर फिल्म तैयार की जाकर सिनेमा स्केप्स, मुम्बई एवं फिल्म फेस्टिवल, गोवा में प्रदर्शन एवं रोड-शो का आयोजन किया गया।

  • डिण्डोरी एवं मण्डला में औषधीय वनस्पतियों के भण्डार को देखते हुए मेडिकल टूरिज्म एवं ट्रायबल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिये सर्वेक्षण करवाया जा रहा है।

  • प्रदेश के प्रख्यात विभूतियों के जन्म-स्थल, कार्य-स्थल पर उनसे संबंधित जानकारी के साइनेजेस लगाये जाना।

  • भारत सरकार की आर्थिक सहायता से भीम-बैठिका, भोजपुर, साँची, अमरकंटक, चित्रकूट, ओरछा, चंदेरी आदि पर्यटक-स्थलों को विकसित किया गया।

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