अल्ट्रा सोनोग्राफी केंद्रों के निरीक्षण की कार्यवाही

भोपाल, अगस्त 2014/ जनसंख्या में स्त्री-पुरुष अनुपात का संतुलन बनाए रखने और बिटिया जन्म को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य में निरंतर कार्य हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने इसी कड़ी में आज जिलों के अभियोजन अधिकारियों की कार्यशाला का आयोजन किया। जिलों में संचालित अल्ट्रा सोनोग्राफी सेंटरों के नियमित निरीक्षणों के पश्चात कानूनी कार्यवाही के संबंध में कार्यशाला में विस्तार से चर्चा हुई। अभियान के तहत वेबसाइट http://www.hamaribitiya.in/ पर लिंग चयन करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध शिकायत की जा सकती है। गर्भ धारण पूर्व एवं निदान तकनीक अधिनियम 1994 के अंतर्गत दोषियों के विरुद्ध रासुका में भी कार्यवाही प्रारंभ की गई है।

प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य प्रवीर कृष्ण ने कार्यशाला में उपस्थित अभियोजन अधिकारियों को संबोधित किया। बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभियान निरंतर गति पकड़ेगा। आगामी माह में सभी जिलों में कलेक्टर, जिला एवं सत्र न्यायाधीश, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, महिला एवं बाल विकास अधिकारी की भागीदारी में कार्यशालाएं आयोजित की जायेंगी। इसके लिए विधि विभाग से परामर्श प्राप्त किया जा रहा है ताकि सोनीग्राफी केंद्र संचालन के दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई में और सख्ती लाई जा सके। तकनीकी कमियों को दूर करने के प्रयास किए जायेंगे। जिला स्तर पर कार्ययोजना तैयार कर संबंधित तरीके से आपराधिक प्रकरणों में कार्यवाही की जाएगी। प्रदेश में गर्भ धारण पूर्व एवं निदान तकनीक अधिनियम 1994 के अंतर्गत राज्य सुपरवाईजरी बोर्ड गठित किया गया है। गत चार माह में राज्य में 628 केंद्रों का निरीक्षण किया जा चुका है। कुल 15 केंद्र सील किए गए हैं एवं आठ प्रकरण न्यायालय में दर्ज हुए हैं। एक प्रकरण में अधिनियम का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध रासुका में कार्यवाही की गई। राज्य के विभिन्न न्यायालय में 36 परिवाद दर्ज हैं। बोर्ड द्वारा प्रोत्साहन योजना में ग्वालियर के डॉ के के दीक्षित को एक लाख रुपए की पुरस्कार राशि भी प्रदान की गई। राज्य निरीक्षण और पर्यवेक्षण दल ने भी निरीक्षण की कार्यवाही की है। मुम्बई हाई कोर्ट ने एडवोकेट उदय वरुण के भी इस क्षेत्र में कार्य और प्राप्त सफलता का विवरण दिया। सचिव गृह डी पी गुप्ता ने अधिनियम के क्रियान्वयन और अन्य वक्ताओं ने शिशु लिंग अनुपात बिगड़ने एवं इसके सामाजिक दुष्परिणामों पर विचार व्यक्त किए। संचालक स्वास्थ्य राजीव दुबे और अन्य अधिकारी कार्यशाला में उपस्थित थे।

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