आखिर बेटी की गुहार रंग लाई और बच गई पिता की जान

दमोह, फरवरी 2013/ कहते हैं कि बेटी जीवन की अंतिम साँस तक साथ देती है। यह सच हुआ है दमोह जिले के तेन्दूखेड़ा जनपद के ग्राम पटनयाऊ के रहवासी श्री सुदामा ठाकुर के साथ। ब्रेन हेमरेज जैसी गंभीर बीमारी और आर्थिक तंगी में उनकी बेटी लक्ष्मी द्वारा प्रदेश के मुख्यमंत्री से की गई गुहार रंग लाई है। उनकी बेटी ने न केवल अंतिम साँस तक साथ दिया बल्कि उनकी साँसे बरकरार रखने का माध्यम भी वह बनी।

मुख्यमंत्री का जबेरा जनपद के ग्राम मुड़ारी में 26 जनवरी 2013 को एक कार्यक्रम था। इसकी जानकारी जिला प्रशासन के ही एक अधिकारी ने दमोह नगर में किराए के मकान में रहकर बी.एङ का अध्ययन और एक संस्थान में कम्प्यूटर चलाकर गुजर-बसर करने वाली लक्ष्मी को दी। लक्ष्मी का प्रश्न था कि मुख्यमंत्री से हमारे जैसे सामान्य लोग का मिलना कैसे संभव होगा। अधिकारी ने कहा कि कार्यक्रम के बाद हमेशा ही मुख्यमंत्री स्थानीय लोगों से मिलते हैं। न केवल मिलते हैं बल्कि उनके दुःख, तकलीफों संबंधी कागजात भी लेते हैं और उनका निराकरण करवाते हैं।

लक्ष्मी पिता की बीमारी का आवेदन तैयार कर मुड़ारी पहुँची। वह मुख्यमंत्री से मिलने में कामयाब भी हो गई। मुख्यमंत्री ने लक्ष्मी के पिता के इलाज के निर्देश दिये। कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह ने जबलपुर स्थित मेट्रो हॉस्पिटल के निदेशक से चर्चा कर लक्ष्मी के पिता का इलाज शुरू करवाया। राज्य बीमारी सहायता निधि से मिली 2 लाख की राशि से आपरेशन सफल हुआ और आज वे परिवार के बीच स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। लक्ष्मी का कहना है कि इसकी खुशी क्या होती है, यह तो वह स्वयं और जिस सुहागिन का सुहाग सही सलामत है वह पत्नी ही अनुभव कर सकती है।

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