एनसीटीसी के स्थान पर एससीटीसी की वकालत

नई दिल्‍ली, जून 2013/ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि केन्द्र सरकार आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मामलों के नीति निर्धारण में अक्सर राज्य सरकारों को विश्वास में नहीं लेती। केन्द्र राज्यों को उनके अधिकारों से वंचित करना चाहता है। साथ ही केन्द्र सरकार लगातार संघीय ढाँचे से खिलवाड़ कर रही है जो संविधान की मूल भावना के विपरीत है। जरूरत है कि केन्द्र सरकार दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्र के हित में सोचे और आतंकवाद तथा नक्सलवाद विरोधी मुहिम में राज्य सरकारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करे।

श्री चौहान नई दिल्ली में आंतरिक सुरक्षा पर मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में बोल रहे थे। बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने की। केन्द्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिन्दे सहित वित्तमंत्री पी. चिदम्मबरम, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री वी. नारायण सामी तथा अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों सहित मध्यप्रदेश के गृहमंत्री उमाशंकर गुप्ता, मुख्य सचिव आर. परशुराम, पुलिस महानिदेशक नन्दन दुबे, केन्द्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में मौजूद थे।

श्री चौहान ने कहा कि आज देश वामपंथी उग्रवाद एवं आतंकवाद की दोहरी चुनौतियों का सामना कर रहा है, जो प्रजातंत्र और संविधान को लगातार कमजोर कर रहे हैं। हाल ही में बस्तर इलाके में वामपंथी उग्रवाद ने नृशंस हत्याकांड किया है जो देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर एक कठोर वार है। केन्द्र की दृढ़ इच्छाशक्ति के अभाव के कारण ही नक्सल प्रभावित जिलों में भ्रम और ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। हिंसा से सख्ती से निपटने की जरूरत है।

श्री चौहान ने केन्द्र द्वारा एनसीटीसी लागू करने का विरोध करते हुए कहा कि राज्यों के अपने अधिकार हैं और केन्द्र सरकार को राज्यों पर भरोसा होना चाहिए। एनआईए जैसी संस्था होने के बावजूद एनसीटीसी जरूरत नहीं है। उन्होंने एनसीटीसी के एवज में एससीटीसी के गठन की माँग की, जिससे आतंकवाद और नक्सलवाद जैसी समस्याओं से निपटा जा सके।

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