एमपी एक्सपोर्टेक में 333 करोड़ के करार

ग्‍वालियर, जनवरी 2013/ सुदूर देशों से आए राजनयिकों, आयातकों और खरीदारों को प्रदेश के उत्कृष्ट उत्पादों और तकनीक ने खूब रिझाया। इन उत्पादों को खरीदने के लिये बड़े-बड़े सौदे भी हुए। ग्वालियर में चौथी एमपी एक्सपोर्टेक (रिवर्स बायर सेलर मीट) में दूसरे दिन अपरान्ह तक ही 333 करोड़ रुपए से अधिक के करारनामे हो चुके थे। इसमें ग्वालियर-चंबल संभाग के उत्पादकों के साथ हुए लगभग 96 करोड़ 70 लाख रुपए के करारनामे शामिल हैं। प्रदेश के उत्कृष्ट उत्पादों और यहाँ हुए आत्मीय स्वागत से विदेशी मेहमान इतने गदगद थे कि उन्होंने खूब धन वर्षा की।

मीट में बार इंदौर में हुई पिछली रिवर्स बायर सेलर मीट की तुलना में साढ़े तीन गुना से अधिक सौदे दूसरे दिन हो चुके हैं। उम्मीद की जा रही है कि इसमें अभी बहुत बड़ा इजाफा होगा। प्रदेश के विक्रेता जहाँ उनके उत्पादों के लिये बाजार मिलने से गदगद हैं वहीं इस मीट में जुटे दुनिया भर के राजनयिक और आयातक यहाँ के उत्कृष्ट उत्पादों को देखकर सम्मोहित हैं।

कोरिया की कंपनी से करार

एमपी एक्सपोर्टेक में मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम और कोरिया की यूब्रेन ट्रेडिंग कंपनी के बीच तकनीक और निवेश के लिए पाँच लाख अमरीकी डॉलर का अनुबंध हुआ। कोरियन कंपनी ने लघु उद्योग निगम से इंडिगो डाई के उत्पादों के विक्रय के लिये विक्रय अनुबंध किया। कंपनी ने प्रदेश के शिल्पियों को इंडिगो डाई मशीनों द्वारा रंगाई की तकनीक देने का अनुबंध भी किया है।

गुलाबी देश के बायर को भी लुभाया

पूरी दुनिया में अपनी खूबसूरती की वजह से रोज कंट्री (गुलाबी देश) के नाम से मशहूर बुलगारिया के खरीदारों को भी मध्यप्रदेश की खूबसूरती और उत्कृष्ट उत्पादों ने खूब लुभाया। बुलगारिया के एक औद्योगिक शहर रूसे से आईं सुश्री ईबा का कहना था कि हमें अपने कॉस्मेटिक कारोबार के लिये जिस तरह के कच्चे माल की जरूरत है उस पर यहाँ के उत्पाद पूरी तरह खरे उतरते हैं।

घाना से आये दवाइयों के व्यवसाय से जुड़े एक बायर श्री कॉफी का कहना था कि यहाँ के हर्बल प्रोडक्ट एंटी डायबेटिक, एंटी हायपरटेंसिव, एंटी मलेरिया तथा जोड़ों संबंधी बीमारियों की दवाएँ तैयार करने के लिये काफी मुफीद हैं। दक्षिण कोरिया से आए लीजुन यान जो फार्मा सेक्टर से जुड़े हैं वे भी यहाँ के उत्पादों से काफी प्रभावित हुए।

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