कड़े कानून के साथ नैतिक आंदोलन जरूरी: शिवराज

माउंट आबू, दिसंबर 2012/ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि समाज में बुराइयों को रोकने के लिए कड़े कानून के साथ-साथ नैतिक अंदोलन की जरूरत है। नैतिक आंदोलन से मनुष्य के मानसिक धरातल को बदला जा सकेगा। मुख्यमंत्री राजस्थान के माउंट आबू में ब्रह्माकुमारीज संस्था के शांति वन में उपस्थित जन-समूह को संबोधित कर रहे थे।

श्री चौहान ने कहा कि बेटियाँ हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, लेकिन वे सुरक्षित नहीं हैं। उनकी सुरक्षा के लिए सुविचारित कड़े कदम उठाने की जरूरत है। विकास का मतलब सिर्फ साधन जुटाना नहीं बल्कि परिवार, समाज और सभी वर्गों में मूल्यों, भाईचारे और प्रेम का विकास करना भी है। आज राजनीति में हर वक्त फिसलने का डर रहता है। उन्होंने प्रार्थना की कि राजनीति और सार्वजनिक जीवन में काम करने वाले सभी लोगों को ईश्वर सद्बुद्धि दे, जिससे समाज और राष्ट्र का समग्र विकास हो सके।

इस अवसर पर संस्था की प्रमुख प्रशासक राजयोगिनी दादी जानकी ने कहा कि जब सब लोग अलग-अलग मजहब, धर्म और जाति की बात करते हैं तब विकृतियाँ पैदा होती हैं। जब हम अपने को शरीर से अलग समझेंगे तब हमारा आपसी सामंजस्य और सद्भाव बढ़ेगा। उन्होंने अपाराधिक घटनाओं को कम करने के लिए आध्यात्मिक क्रांति की आवश्यकता बतायी। संस्था के महासचिव श्री बी.के. निर्वेर ने भी अपने विचार व्यक्त किए। राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी ने कहा कि नया युग दस्तक दे रहा है, जिसमें हमें अपने संस्कार बदलने की जरूरत है।

ध्यान में लीन हुए मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने ब्रह्माकुमारीज की पूर्व मुख्य प्रशासक दादी प्रकाशमणि की समाधि पर पुष्प अर्पित किए। वे वहाँ ध्यान कक्ष में काफी देर तक ध्यान में लीन रहे। मुख्यमंत्री का दादी जानकी, दादी रतनमोहिनी और बी.के. निर्वेर ने स्मृति-चिन्ह भेंटकर उनका सम्मान किया। इस दौरान मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह और उनके दोनों पुत्र उपस्थित थे।

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