केन्द्रीय करों का 50 प्रतिशत राज्यों को मिले

नई दिल्‍ली, दिसंबर 2012/ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केन्द्र द्वारा राज्यों को कल्याणकारी कार्यक्रमों को लागू करने की जिम्मेदारी दी जा रही है इसलिए केन्द्रीय करों से राज्यों को 50 प्रतिशत राशि भी मिलना चाहिए। केन्द्र अपने कराधान और संसाधन बढ़ाता जा रहा है। इससे राज्यों का हिस्सा कम होता जा रहा है। केन्द्रीय योजनाओं को राज्यों पर थोपा नहीं जाना चाहिए। राज्यों को अपनी आवश्यकता के अनुसार कार्यक्रम निर्धारित करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। केन्द्रीय योजनाओं की पूरी राशि केन्द्र द्वारा ही वहन की जानी चाहिए। श्री चौहान नई दिल्ली में राष्ट्रीय विकास परिषद की 57वीं बैठक को संबोधित कर रहे थे।

श्री चौहान ने कहा कि किसानों की भलाई और खेती को लाभकारी बनाने के लिए उर्वरकों की कीमत साल की शुरूआत से ही तय कर दी जानी चाहिए। छोटे किसानों के हित में उर्वरकों की बढ़ी कीमतों को फौरन वापस लेना चाहिये। खेती में सिंचाई की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए बारहवीं योजना को ”जल योजना” घोषित किया जाए।

बारहवीं योजना में स्कूल शिक्षा पर ध्यान देने की सराहना करते हुए श्री चौहान ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम अच्छी तरह लागू करने में राज्यों का बजट गड़बड़ा रहा है। धनराशि का वितरण 50-50 प्रतिशत करने से राज्यों का वित्तीय प्रबंधन प्रभावित होगा। इसलिए केन्द्र को धनराशि का आवंटन 90:10 के अनुपात में करना चाहिए।

प्रदेश में प्रमुख क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ गिनाते हुए केन्द्र की भूमिका और राज्यों की स्थिति को प्रभावी रूप से उठाते हुए शिवराजसिंह ने समाजिक कल्याण, समावेशी विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, कृषि एवं उद्योग जैसे क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को रेखांकित किया। कहा कि आर्थिक उदारवाद के पिछले दो दशक में देश की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में राज्यों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गयी है।

बताया कि 11वीं योजना की उपलब्धियों और 2011-12 में 11.98 प्रतिशत विकास दर हासिल करने से उत्साहित होकर बारहवीं योजना में प्रदेश में 12 प्रतिशत विकास दर हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। संसाधनों के बेहतर उपयोग, कार्यक्रमों के कुशल संचालन और सुशासन से यह लक्ष्य प्राप्त करना आसान होगा। केन्द्रीय योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन वाले राज्यों के लिए ज्यादा केन्द्रीय राशि का प्रावधान होना चाहिए। केन्द्रीय योजनाओं के संबंध में एकतरफा निर्णय लेने की प्रवृत्ति केन्द्र-राज्य संबंधों के लिए उचित नहीं है। राज्यों के अधिकार क्षेत्र में केन्द्र का अनावश्यक हस्तक्षेप ठीक नहीं है।

बारहवीं योजना में छोटे किसानों को मिलने वाले केन्द्रीय अनुदान की सीमा 75 प्रतिशत तक होना चाहिए। सभी राज्यों के उत्पादन का एक-सा समर्थन मूल्य घोषित होना चाहिए। कोदो, कुटकी, रागी जैसे मोटे अनाज का समर्थन मूल्य भी घोषित किया जाना चाहिए। बारहवीं योजना में सिंचाई के लिए 11वीं योजना के मुकाबले पाँच गुना राशि का प्रावधान किया जाए। बरगी डायवर्सन परियोजना तथा नर्मदा बेसिन से सोन एवं टोंस नदियों में जल स्थानांतरण करने की योजना की चर्चा करते हुए कहा कि इसे ”राष्ट्रीय परियोजना” घोषित किया जाना चाहिए। लघु सिंचाई योजनाओं के व्यय को 1.5 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 3 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर बढ़ाया जाना चाहिए। नर्मदा-क्षिप्रा लिंक परियोजना पर काम शुरू होने की जानकारी देते हुए कहा कि केन्द्र को इस परियोजना के लिए वित्तीय सहायता देना चाहिये। सहकारिता के माध्यम से किसानों को सहयोग देने के लिए सहकारिता बैंकों की रीफाइनेंस की सीमा बढ़ाकर 75 प्रतिशत की जाए।

बढ़ते कृषि उत्पादन के संदर्भ में मध्यप्रदेश को देश का भण्डारण हब बनाने के लिए सहायता देने का आग्रह किया। कहा कि राज्य को 41 लाख बीपीएल परिवारों के आधार पर खाद्यान्न मिल रहा है जबकि राज्य में 74 लाख बीपीएल परिवार रहते हैं। बारहवीं योजना में 13 हजार 500 मेगावाट विद्युत उत्पादन बढ़ाने की चर्चा करते हुए कहा कि कोयला आवंटन, अनुबंधित मात्रा में वार्षिक प्रदाय और पर्यावरणीय स्वीकृतियों से संबंधित मुद्दों का समाधान कर इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

श्री चौहान ने कहा कि अगले साल जून महीने से सभी गाँव को 24 घंटे बिजली उपलब्ध करवाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए फीडर विभाजन को गति देना जरूरी है। इसके लिए केन्द्रीय सहायता की जरूरत होगी। 2014 से राज्य में सरप्लस विद्युत उपलब्ध होगी। गैर-पारम्परिक ऊर्जा स्त्रोतों के विस्तार में केन्द्रीय सहयोग की अपेक्षा करते हुए कहा कि देश की सबसे बड़ी सौर उर्जा परियोजना मध्यप्रदेश में स्थापित हो रही है। नवकरणीय ऊर्जा के उपयोग को अनिवार्य करने के संबंध में कानूनी प्रावधान किये जाने चाहिए।

औद्योगिक विकास के माध्यम से रोजगार निर्माण की चर्चा करते हुए कहा कि राज्य सरकारों, केन्द्र सरकार और निजी क्षेत्र के परस्पर सहयोग से ही निर्माण क्षेत्र में 10 करोड़ नौकरियाँ देने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। विकास के लिए बहुत से राज्य नये निवेश प्रस्तावों पर ध्यान दे रहे हैं इसलिए आपस में प्रतिस्पर्धा की स्थिति है। इस दिशा में केन्द्र सरकार को राष्ट्रीय स्तर पर सहमति बनाने की पहल करनी चाहिए। भूमि अधिग्रहण नीति नये निवेश प्रस्तावों और नये औद्योगिक केन्द्र के विकास में बाधक नहीं बनना चाहिए। मुख्यमंत्री ने श्रमिकों को कौशल विकास से जोड़ने के महत्व की चर्चा करते हुए कहा कि श्रमिकों के कल्याण से संबंधित कानूनों में समयानुसार बदलाव किया जाना जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने जिलों एवं प्रमुख नगरों को रेल नेटवर्क से जोड़ने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि नई रेल लाइन बिछाने का खर्च केन्द्र सरकार को ही उठाना चाहिए। गाँव को सड़कों से जोड़ने के लिए जनसंख्या के वर्तमान मापदण्ड को बदलने की जरूरत बताते हुए कहा कि जनजातीय जनसंख्या वाले जिन विषम भौगोलिक क्षेत्रों में निर्माण लागत ज्यादा आती है वहाँ राज्य को अधिक संसाधन उपलब्ध करवाने और ज्यादा से ज्यादा सड़कें स्वीकृत करने की पहल की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में बनी जिन सड़कों को 10 साल हो गये हैं उनके संधारण और पुनः निर्माण के लिए भी केन्द्र को 50-50 प्रतिशत आधार पर संसाधन उपलब्ध करवाने चाहिए।

लोक निर्माण विभाग की राष्ट्रीय राजमार्ग विंग को राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास की एजेंसी बनाने का आग्रह करते हुए कहा कि अनावश्यक विलंब से बचने के लिए इस एजेंसी को तकनीकी और वित्तीय स्वीकृति एवं भुगतान संबंधी अधिकारों के उपयोग की अनुमति दी जानी चाहिए।

नगरीय विकास के लिए उठाये गये नवाचारी कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि राजीव आवास योजना में शहरी गरीबों पर वित्तीय भार कम करने के लिए भारत सरकार को 80 प्रतिशत राशि उपलब्ध करवानी चाहिए। ग्रामीण आवासों के संबंध में मध्यप्रदेश को इंदिरा आवास योजना में कम राशि मिली है जबकि 2011 की जनगणना के आधार पर प्रदेश को कम से कम 3 लाख 80 हजार मकान प्रतिवर्ष का लक्ष्य मिलना चाहिए।

प्रदेश की ग्रामीण बसाहटों में 55 लीटर प्रति व्यक्ति जल उपलब्ध करवाने में सफलता के संदर्भ में कहा कि बारहवीं योजना में मध्यप्रदेश को 3 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त मिलना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों में विद्यार्थियों को फेल न करने की नीति पर दोबारा विचार की आवश्यकता है। सभी धर्मों की नैतिक शिक्षा एवं दर्शन को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। सार्वजनिक क्षेत्र में उच्च शिक्षा के गुणवत्तापूर्ण संस्थानों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। तकनीकी जनशक्ति की बाजार में माँग के अनुसार निरंतर जानकारी के लिए संस्थागत व्यवस्था की आवश्यकता है। इसके साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर लघु अवधि के सर्टिफिकेट कोर्स के लिए भी संस्थागत व्यवस्था की जरूरत है।

अनुसूचित जनजाति कल्याण की गतिविधियों की चर्चा करते हुए कहा कि जिन जिलों में जनजातीय जनसंख्या 25 प्रतिशत से ज्यादा है उन्हें आदिवासी उपयोजनाओं के अंतर्गत विशेष क्षेत्र माना जाना चाहिये। बारहवीं योजना में आदिवासी उपयोजना में केन्द्रीय अनुदान भी बढ़ाया जाना चाहिये।

लोक स्वास्थ्य के क्षेत्र में चिकित्सकों और पेरामेडिकल अमले की कमी को देखते हुए  कहा कि केन्द्र सरकार को बड़ी संख्या में मेडिकल कॉलेज खोलने से संबंधित एक वृहद कार्यक्रम के साथ आगे आना होगा। उन्होंने इंडियन मेडिकल काउंसिल अधिनियम 1956 को भी वर्तमान परिदृश्य में संशोधित करने की आवश्यकता बतायी।

पुनरीक्षित एकीकृत बाल विकास योजना के अंतर्गत आंगनवाड़ी भवनों की निर्माण लागत राशि को प्रति यूनिट बढ़ाने की चर्चा करते हुए कहा कि केन्द्र द्वारा तय की गयी 4 लाख 50 हजार की राशि अपर्याप्त है। बेटी बचाओ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि बेटियों की सुरक्षा और महिलाओं को अधिकार सम्पन्न बनाने में राष्ट्रीय स्तर पर आम सहमति बनना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने ग्रीन इंडिया मिशन के माध्यम से 50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को हरा-भरा बनाने के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध करवाने पर जोर देते हुए कहा कि उन राज्यों को भी क्षतिपूर्ति राशि देने की आवश्यकता है जो अपने संसाधनों से वनों की देखरेख कर रहे हैं और देश के पर्यावरण की सुरक्षा में भी योगदान दे रहे हैं। बाघ परियोजना क्षेत्रों के गाँवों के विस्थापन के लिए प्रदेश में 3300 करोड़ रुपये अनुदान उपलब्ध करवाया जाना चाहिए। इसी प्रकार खनिज संसाधनों के दोहन की पूरी रॉयल्टी राज्यों को मिलनी चाहिए। पर्यटन परियोजनाओं को लागू करने में राज्य को पूरी स्वतंत्रता दी जाए।

मुख्यमंत्री ने सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में स्थापित अधोसंरचनात्मक व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भोपाल में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस अकादमी स्थापित करने के लिए राज्य सरकार भूमि उपलब्ध करवाने और हरसंभव सहयोग देने के लिए सहमत है।

मुख्यमंत्री ने आंतरिक सुरक्षा के संबंध में बारहवीं योजना में अधोसंरचनात्मक व्यवस्था मजबूत करने, अनुसंधान, क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण और कौशल उन्नयन पर ध्यान देने की जरूरत बतायी। ई-प्रशासन एवं सुशासन की पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि पारदर्शी प्रशासन के लिए मध्यप्रदेश में उल्लेखनीय कदम उठाये गये हैं।

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