कैप भंडारण की दर तत्काल बढ़ाये केन्द्र: मुख्‍यमंत्री

भोपाल, फरवरी 2013/ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केन्द्र सरकार से प्रदेश में केप भंडारण की दरों को तत्काल प्रभाव से पुनरीक्षित करने का आग्रह किया ताकि आने वाले रबी सीजन में गेहूँ का उपार्जन लाभदायी तरीके से किया जा सके।

श्री चौहान ने केन्द्रीय खाद्य राज्य मंत्री के.वी. थामस को इस संबंध में लिखे पत्र में कहा है कि भारत सरकार द्वारा समय-समय पर कवर्ड गोडाउन भंडारण की दरें 2004-05 से हर साल पुनरीक्षित की जाती रही जबकि कैप भंडारण की दरें 2004-05 के बाद केवल एक बार 2010-11 में बढ़ाई गई जो पूरी तरह से अपर्याप्त है।

श्री चौहान ने कहा कि पिछले कुछ सालों में राज्य में गेहूँ का उत्पादन अभूतपूर्व रूप से बढ़ा है। परिणाम स्वरूप समर्थन मूल्य पर उपार्जन भी बढ़ गया है। वर्ष 2012-13 में रबी में गेहूँ का उपार्जन 85 लाख मीट्रिक टन था जो 2013-14 के रबी मौसम में 120 लाख मीट्रिक टन से भी ज्यादा बढ़ सकता है।

राज्य में भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिये उठाये गये सभी जरूरी कदमों और व्यवस्थाओं के बावजूद राज्य में भंडारण की कमी है। भंडारण की स्थिति में लगातार सुधार होने के बावजूद कुछ समय लगेगा। पिछले साल कैप में 22 लाख मीट्रिक टन गेहूँ भंडारित किया गया। इस साल रबी में केप्स में 45 लाख मीट्रिक टन के भंडारण का अनुमान है जबकि पिछले साल भंडारण क्षमता में करीब 14 लाख मीट्रिक टन की बढ़ोत्तरी हुई।

पत्र में लिखा कि भारत सरकार ने समय पर कवर्ड गोडाउन की दर पुनरीक्षित की जाती रही है। प्रतिमाह प्रति टन भंडारण की दरें हर सल पुनरीक्षित होती रही। वर्ष 2004-05 में 38 रूपये, 2005-06 में 41.20 रूपये, 2006-07 में 41.40 रूपये, 2007-08 में 42.60 रूपये, 2008-09 में 49 रूपये, 2009-10 में 54.60 रूपये की बढ़ोत्तरी हुई।

कैप भंडारण की दरें इस अनुरूप पर नहीं बढ़ाई गई। केप भंडारण की दर 2004-05 मे 18.40 प्रति मीट्रिक टन प्रतिमाह तय की गई थी। इसे वर्ष 2010-11 में मात्र एक बार पुनरीक्षित कर 20.80 प्रति मीट्रिक टन प्रतिमाह किया गया। यह पूरी तरह से अपर्याप्त है।

श्री चौहान ने कहा कि पक्का कैप बनाने की वास्तविक लागत 900 रूपये प्रति मीट्रिक टन आती है और यह अनुमानित रूप से पाँच साल तक उपयोग में आती है। इसलिये निर्माण कार्य की प्रभावी लागत 180 रूपये प्रति मीट्रिक टन सालाना आती है। इसके अलावा संरक्षण की लागत 450 रूपये प्रति मीट्रिक टन सालाना आती है। भंडारण पर कुल लागत 630 रूपये प्रति मीट्रिक टन सालाना और 52.25 प्रति मीट्रिक टन प्रति माह आती है जबकि मध्यप्रदेश को केवल 20.80 प्रति मीट्रिक टन प्रतिमाह प्राप्त हुये।

केप स्टोरज के लिये प्रतिपूर्ति की दर गोडाउन भंडारण की दर का मात्र 38 प्रतिशत है, जबकि भंडारण की लागत एक समान है। इसीलिये तत्काल प्रभाव से केप भंडारण की दर को बढ़ाने की आवश्यकता है।

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