कोलार को ननि में शामिल करें या चुनाव कराएं

भोपाल, दिसंबर 2012/ मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य शासन को निर्देश दिया है कि या तो वह कोलार नगर पालिका को भोपाल नगर निगम में शामिल करे और यदि ऐसा नहीं होता तो वहां चार माह में चुनाव कराए जाएं।

कोर्ट ने को कोलार जनजागृति समिति के सचिव उत्तम समार की जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद ये निर्देश दिए। मुख्य न्यायाधीश शरद अरविन्द बोबड़े व जस्टिस आलोक आराधे की युगलपीठ के समक्ष प्रकरण की सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता के वकील राधेलाल गुप्ता व एसके गर्ग ने दलील दी कि नगर पालिका कोलार का गठन 6 दिसम्बर 2007 को हुआ था और इसके कार्यकाल की समाप्ति 6 दिसम्बर 2012 को हो रही है। इसी लिहाज से चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। मध्यप्रदेश निर्वाचन आयोग ने वार्डों का आरक्षण व निर्धारण कराया। प्रारंभिक मतदाता सूची का प्रकाशन कर आपत्तियां भी आमंत्रित कर ली गईं और 10 नवंबर 2012 को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन भी हो गया। लेकिन उसके बाद अचानक चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई।

नगर पालिका अधिनियम की धारा- 36 (2-बी) के अनुसार 5 साल का कार्यकाल पूरा होने के 6 माह पूर्व ही चुनाव कराए जाने का प्रावधान है। कोलार में इसी प्रावधान के तहत चुनाव कराए जा रहे थे, जिस पर अंकुश कठघरे में रखे जाने योग्य है। यदि कोलार नगर पालिका को भोपाल नगर निगम में शामिल करने की मंशा से चुनाव रोका गया है तो ऐसा किया जाना अनुचित है।

महाधिवक्ता ने स्पष्ट की स्थिति

बहस के दौरान महाधिवक्ता आरडी जैन व उप महाधिवक्ता पुस्र्षेन्द्र कौरव ने राज्य की ओर से स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि कोलार नगर पालिका को भोपाल नगर निगम में शामिल करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसी वजह से चुनाव को औचित्यहीन पाते हुए रोक लगा दी गई। विलय के संबंध में विधिवत अधिसूचना के साथ ही आपत्तियां आमंत्रित की जा रही हैं जिन पर विचार के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

तीन माह में लें निर्णय

कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आदेश में कहा कि राज्य शासन तीन माह में आपत्तियों का निराकरण करे। इसके साथ ही कोलार पालिका को भोपाल नगर निगम में शामिल किया जाए और यदि ऐसा नहीं होता तो चार माह में नगर पालिका कोलार के चुनाव सम्पन्न् कराए जाएं।

 

यह थी याचिका

कोलार जनजागृति समिति के सचिव उत्तर समार ने बताया कि 26 नवंबर को दाखिल की गई याचिका में कहा गया कि नगर पालिका चुनाव की तैयारी होने के बाद अचानक इसे नगर निगम में शामिल करने का निर्णय लिया गया जो गलत था। कोर्ट से नगरपालिका चुनाव कराने की याचना की गई थी।

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