गरीबों के लिये सस्ते (एफोर्डेबल) मकान

भोपाल, अक्टूबर  2014/ मध्‍यप्रदेश मंत्रि-परिषद् ने दृष्टि-पत्र-2018 के अनुसार कमजोर आय वर्ग (ई.डब्ल्यू.एस.) और निम्न आय वर्ग (एल.आई.जी.) परिवारों को कम लागत के आवास उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से जन-निजी भागीदारी (पीपीपी) मोड में योजना की मंजूरी का अनुसमर्थन करते हुए योजना के लिये जारी मार्गदर्शी सिद्धांतों का अनुमोदन कर दिया है।

परियोजना भूमि का वह क्षेत्रफल जिस पर ये आवास निर्मित होने हैं उसे किसी भी प्र-ब्याजि के बिना एक रुपये प्रतिवर्ष के भू-भाटक पर संबंधित नगरीय निकाय अथवा स्थानीय निकाय को स्थानांतरित किया जायेगा।

योजना में शासकीय भूमि संबंधित नगर विकास प्राधिकरण एवं विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण द्वारा अपने क्षेत्राधिकार में शासकीय भूमि को परियोजना निर्माण के लिये चिन्हित किया जायेगा। प्राधिकरण इस भूमि को हस्तांरित करने के लिये जिला कलेक्टर को आवेदन करेंगे। प्रस्तावित भूमि परियोजना के लिये उपयुक्त है या नहीं इस पर कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति विचार करेगी। संभागीय मुख्यालय में समिति के अध्यक्ष संभाग के आयुक्त होंगे। भोपाल निवेश क्षेत्र में आरक्षण की कार्यवाही कलेक्टर के प्रस्ताव पर नगरीय विकास एवं पर्यावरण विभाग के अंतर्गत गठित सचिव स्तरीय समिति द्वारा की जायेगी। भूमि आरक्षण के बाद प्राधिकरण परियोजना की तकनीकी-आर्थिक संभाव्यता के आधार पर प्रस्ताव तैयार करेगा। परियोजना इस तरह तैयार की जायेगी कि इसके क्रियान्वयन के लिये व्ही.जी.एफ. की आवश्यकता न हो।

परियोजना के क्रियान्वयन में कठिनाइयों को दूर करने में अटल आश्रय योजना के लिये गठित मंत्रि-परिषद् समिति सक्षम होगी।

मंत्रि-परिषद् ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की परियोजना परीक्षण समिति की अनुशंसा अनुसार 12वीं पंचवर्षीय योजना के लिये ‘शहरी सुधार कार्यक्रम’ का अनुमोदन किया। इसके क्रियान्वयन के लिये नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय में शहरी सुधार प्रकोष्ठ का गठन किया जायेगा। इसमें दो वित्त विशेषज्ञ, एक-एक जीआईसी विशेषज्ञ और ई-गवर्नेंस विशेषज्ञ तथा 4 कार्यालय सहायक-सह कम्प्यूटर ऑपरेटर होंगे।

परियोजना की लागत 184 करोड़ 28 लाख रुपये है। इसमें से 9 करोड़ 53 लाख रुपये वर्ष 2013-14 के लिये, 43 करोड़ 14 लाख रुपये वर्ष 2014-15 के लिये, 33 करोड़ 76 लाख रुपये वर्ष 2015-16 के लिये, 49 करोड़ 7 लाख रुपये वर्ष 2016-17 के लिये और 48 करोड़ 80 लाख रुपये वर्ष 2017-18 के लिये स्वीकृत किये गये हैं।

 

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