गांवों में विकास कार्यों का भौतिक सत्यापन आज से

भोपाल, दिसंबर 2012/ ग्रामीण अंचलों में चल रहे लोक कल्याणकारी कार्यक्रमों और विकास योजनाओं का लाभ ग्रामवासियों विशेषकर समाज के सर्वाधिक जरूरतमंद लोगों तक पहुँचे। विकास कार्यों की गुणवत्ता के साथ ही पारदर्शिता भी सुनिश्चित हो सके, इस उद्देश्य से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं के भौतिक सत्यापन और सामाजिक अंकेक्षण का राज्यव्यापी अभियान 3 दिसम्बर से शुरू किया जा रहा है। यह अभियान आगामी 20 दिसम्बर तक निरन्तर जारी रहेगा। इस अवधि में भौतिक सत्यापन कर्त्ताओं को प्रशिक्षण के बाद आवश्यक प्रपत्र दिये जायेंगे । वे ग्राम भ्रमण तथा घर-घर सम्पर्क कर हितग्राहीमूलक कार्यक्रमों और विकास कार्यों का विवरण इन प्रपत्रों में दर्ज करेंगे। ऐसी सभी संकलित जानकारियों के प्रस्तुतिकरण और उनके बारे में ग्रामवासियों का अभिमत जानने के लिए 16 से 20 दिसम्बर के दौरान विशेष ग्राम सभाएँ होगी। ग्राम सभा का अभिमत लेने के बाद 25 दिसम्बर तक जानकारियों की प्रविष्टि जनपद स्तर पर वेब पोर्टल पर की जाएगी। भौतिक सत्यापन और सामाजिक अंकेक्षण के संबंध में सभी जानकारियाँ 26 दिसम्बर को राज्य स्तर पर उपलब्ध करवा दी जायेगी।

भौतिक सत्यापन तथा सामाजिक अंकक्षेण के इस राज्य व्यापी अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिये मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत नोडल अधिकारी बनाए गए हैं। इसके अलावा राज्य तथा जिला-स्तर पर अभियान के पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी भी वरिष्ठ अधिकारियों को सौपी गई है। राज्य में मनरेगा सहित ग्रामीण विकास तथा सामाजिक न्याय विभाग की कल्याणकारी योजनाओं और हितग्राहीमूलक कार्यों के भौतिक सत्यापन और सामाजिक अंकेक्षण के इस प्रभावी प्रयास की सफलता सुनिश्चित करने के संबंध में आज भोपाल में एक राज्य स्तरीय कार्यशाला हुयी। यह आयोजन मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गांरटी परिषद् और क्षेत्रीय ग्रामीण विकास प्रशिक्षण केन्द्र भोपाल द्वारा किया गया था। कार्यशाला में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम और जन अभियान परिषद् ने सहयोगी भूमिका निभाई।

आयुक्त मनरेगा डॉ. रवीन्द्र पस्तोर ने ग्रामीण विकास में जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विकास का लाभ समाज की अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण कार्य है। यह भी आवश्यक है कि विभिन्न निर्देश, आदेश और जानकारियाँ राज्य स्तर से ग्राम पंचायत स्तर तक ठीक से पहुँचे। इसके साथ ही ग्राम सभाओं के माध्यम से विभिन्न योजनाओं में मिलने वाली राशि, विकास कार्यों पर हुए खर्च तथा हितग्राहीमूलक योजनाओं की पात्रता के बारे में सही जानकारी ग्रामीणों को मिलने के संबंध में भी जागरुकता लाई जाना चाहिये।

श्री पस्तोर ने ग्राम सभाओं में जन भागीदारी को बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि हर ग्राम, जनपद और जिला पंचायत स्तर पर बोर्ड लगाकर मनरेगा में मिलने वाले बजट की जानकारी प्रदर्शित की जाए। उन्होंने कहा कि विकास योजनाएँ समुदाय के कल्याण के लिए है। इन कार्यों की सफलता के लिये यह जरूरी है कि टीम वर्क तथा सही प्रबंधन के साथ उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग हो। श्री पस्तोर ने जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों से कहा कि वे नई तकनीकों को सीखे और सूचना शक्ति से अपनी कार्य क्षमता को बढ़ाये। उन्होंने कहा कि कम्प्यूटर तथा लेपटाप से किये जाने वाले कार्यों की प्रतिपूर्ति के लिये विशेष भत्ता देने के प्रस्ताव पर भी विभाग द्वारा विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब भविष्य में नरेगा सॉफ्ट के माध्यम से ही ग्राम पंचायत से राज्य स्तर और केन्द्र सरकार तक जानकारियों का सम्प्रेषण होगा।

कार्यशाला में जन अभियान परिषद् के उपाध्यक्ष डॉ. अजयशंकर मेहता, संचालक सामाजिक अंकेक्षण डॉ. अभय पाण्डेय और एनआईसी के तकनीकी संचालक सुनील जैन के साथ ही विकास आयुक्त कार्यालय और मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद् के अधिकारियों ने विभिन्न विषयों के बारे में प्रतिभागियों को जानकारी दी। आभार यूएनडीपी के राज्य परियोजना समन्वयक बीनू चतुर्वेदी ने जताया। कार्यशाला में आईएपी जिलों में नियुक्त प्रधानमंत्री फैलो प्रतिनिधि, जन अभियान परिषद् के विकास खण्ड समन्वयक तथा वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भागीदारी की।

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