गुजरात से सिंह लाने की सभी बाधाएँ दूर करें

भोपाल, जुलाई 2014/ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कूनो पालपुर अभयारण्य में गुजरात राज्य से सिंह लाने की प्रक्रिया में आने वाली सभी बाधाएँ दूर करें ताकि मध्यप्रदेश में सिंह को बसाने का काम जल्दी शुरू हो सके। उन्होंने गिद्ध, बारहसिंघा और सोन चिड़िया को बचाने के लिये विशेष प्रयास करने के निर्देश दिये।

श्री चौहान यहाँ मध्यप्रदेश राज्य वन्य-प्राणी बोर्ड की ग्यारहवीं बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्‍होंने कान्हा एवं सतपुड़ा टाईगर रिजर्व को इंडिया बायो-डायवर्सिटी अवार्ड मिलने पर वन विभाग एवं संबंधित अमले को बधाई दी। पन्ना नेशनल पार्क में बाघों की संख्या बढ़ाने के प्रयोग को देश और विदेश के लिये अनोखा उदाहरण बताते हुए वन विभाग और परियोजना से जुड़े अमले की सराहना भी की।

मुख्यमंत्री ने पशु चिकित्सकों द्वारा पशुओं के इलाज के लिये उपयोग की जा रही दर्द निवारक दवा डिक्लोफिनेक से गिद्धों और अन्य पक्षियों पर होने वाले हानिकारक प्रभाव के संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिये। कहा कि वन, पशुपालन और पंचायत विभाग मिलकर इस संबंध में प्रचार अभियान शुरू करें। विशेष ग्राम सभाओं के मंच का भी उपयोग करें।

प्रदेश के टाईगर रिजर्व से गाँवों के विस्थापन के कार्य में विस्थापित परिवारों की सहमति लेने और इस कार्य में केम्पा (क्षतिपूरक वनरोपण कोष प्रबंधन और नियोजन प्राधिकरण) के अंतर्गत उपलब्ध राशि का उपयोग करने को कहा। मुख्यमंत्री ने भारत सरकार और बाम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी द्वारा केरवा भोपाल में शुरू किये गये गिद्ध प्रजनन केन्द्र की पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि गिद्धों की प्रजाति को बचाना पर्यावरण के लिये जरूरी है।

नील गायों की बढ़ती संख्या और उनके द्वारा किसानों की फसल का नुकसान करने के संबंध में मिल रही रिपोर्ट को देखते हुए वन्य-जीव विशेषज्ञों से आग्रह किया कि वे इस संबंध में कार्ययोजना बनाये ताकि नील गायों की सुरक्षा और प्रबंधन के साथ-साथ किसानों की फसलों को भी नुकसान न हो। कूनो पालपुर अभयारण्यों में सोन चिड़िया के प्रजनन के लिये अनुकूल वातावरण को देखते हुए केप्टिव ब्रीडिंग के लिये भी वन्य-जीव विशेषज्ञों की सलाह पर प्रस्ताव तैयार किया जाए। बैठक में राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों के 10 किलोमीटर की परिधि में होने वाले विकास कार्यों की अनुमति के प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। रातापानी अभयारण्य में 10 किलोमीटर की परिधि में कोल आधारित केप्टिव थर्मल पावर प्लांट के निर्माण की अनुमति के संबंध में निर्णय लिया गया कि इसकी अनुमति लेने के लिये राष्ट्रीय वन्य-प्राणी बोर्ड को प्रस्ताव भेजा जाये। इसी प्रकार रातापानी अभयारण्य में स्टील सायलो निर्माण के संबंध में भी राष्ट्रीय वन्य-प्राणी बोर्ड से अनुमति लेने का निर्णय लिया गया। सिंघोरी अभयारण्य की सीमा से 10 किलोमीटर की परिधि में 765 के.व्ही सिंगल सर्किट ट्रांसमिशन विद्युत लाइन डालने के संबंध में अनुमति का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजने का निर्णय लिया गया।

इसी प्रकार रातापानी अभयारण्य के अंतर्गत हबीबगंज से बरखेड़ा के बीच तीसरी रेल लाइन के निर्माण, सिंघोरी अभयारण्य की सीमा के भीतर नहर के पुनरूद्धार, रातापानी अभयारण्य में आमडो से सुरई ढाबा मार्ग के उन्नयन, नौरादेही अभयारण्य (दमोह) में बालाकोट-चिरई-मनका के सर्वेक्षण और उन्नयन, सोन चिड़िया अभयारण्य घाटीगाँव (ग्वालियर) में डाडाखिरक से तिघरा तक सड़क निर्माण, सोन चिड़िया अभयारण्य घाटीगाँव में मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना में पहुँच मार्गों के निर्माण, बगदरा वन्य-प्राणी अभयारण्य सिंगरौली में बेलदरा तालाब लघु सिंचाई योजना, संजय टाइगर रिजर्व में संजय दुबरी अभयारण्य में कटनी, सिंगरौली रेलवे लाइन से अतिरिक्त रेलवे लाइन के निर्माण, माधव राष्ट्रीय उद्यान (शिवपुरी) में भूमिगत सीवर लाइन बिछाने से संबंधित प्रस्ताव पर चर्चा हुई।

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के अंतर्गत पचमढ़ी में धूपगढ़, महादेव और चौरागढ़ और बड़ा महादेव तथा नागद्वारी धार्मिक स्थल हैं। इनमें शिवरात्रि और नागपंचमी पर मेले लगते हैं और 15 से 20 लाख श्रद्धालु इकट्ठे होते हैं। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिये इन क्षेत्रों को अनारक्षित कर जन-सुविधाओं के निर्माण के संबंध में राष्ट्रीय वन्य-प्राणी बोर्ड को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिये। कहा कि श्रद्धालुओं की श्रद्धा को देखते हुए इन क्षेत्रों को अनारक्षित किये बिना सुविधाएँ उपलब्ध करवाने की अनुमति के प्रयास करें।

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