गेंदाफूल ने बढ़ाया भिण्ड के किसानों का रुतबा

भिण्ड, दिसंबर 2012/  जिले में किसान परिवारों के जीवन में गेंदा के फूलों ने खुशियों के रंग इस तरह बिखेरे कि उनका आर्थिक और सामाजिक रुतबा बढ़ गया। उनकी पूछ-परख तो बढ़ी ही, वे अब दूसरों को जीवन-यापन में भी मददगार साबित हो रहे हैं। लहार निवासी रामतीरथ कुशवाह इसकी अच्छी मिसाल हैं। उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार की बागवानी विकास योजना में फूलों की खेती कर खुशहाली की नई इबारत लिख दी है।

कुछ साल पहले एक बीघा जमीन पर गेंदे की खेती भाड़े से शुरूआत करने वाले रामतीरथ की मेहनत और लगन से प्रभावित होकर उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने उन्हें हाईब्रीड बीज और प्रशिक्षण के साथ-साथ तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध करवाया। परिणामस्वरूप वह आज छह बीघा जमीन पर खेती करने लगे। गेंदे की खेती से उनका व्यवसाय इतना फला कि उन्होंने एक ट्रेक्टर और अन्य आवश्यक सामान खरीद लिया। वह अब गेंदे की फसल के साथ-साथ गिलाड़िया की भी खेती करने लगे। दोनों फसलों से उन्हें तीन लाख रुपये की वार्षिक आमदनी होने लगी है। उन्होंने इसी व्यवसाय के मुनाफे से अपनी बहन के हाथ भी पीले कर दिये। कुशवाह समाज में रामतीरथ की पूछ-परख अच्छी हो गई है। अब वह स्थानीय स्तर पर मुखिया हो गये हैं।

राम तीरथ नजदीकी गाँव सलैया से काम की तलाश में लहार आये थे। काम तो नहीं मिला पर एक दिन उसकी निगाह लहलहाते गेंदे के फूलों के खेत पर पड़ गई। उनके मन में विचार आया कि क्यों न खुद खेती का व्यवसाय किया जाए। खेत भाड़े पर लेने के लिए रकम की जरूरत थी तो उनके अच्छे व्यवहार के कारण यह व्यवस्था भी हो गई। अब उन्हें सही मार्गदर्शन की जरूरत थी सो उनके एक साथी ने सलाह दी कि वह उद्यानिकी अफसर से मिले। एक दिन वे उद्यानिकी विभाग के कार्यालय जा पहुँचे। उन्हें वहाँ से समय पर समुचित मार्गदर्शन ही नहीं मिला बल्कि अफसर भी आगे आए और उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण दिया। रामतीरथ के फूलों की खेती के व्यवसाय से साल भर में 500 महिलाओं को रोजगार मिल रहा है। उनके यहाँ 6 लड़के केवल मालाएँ गूँथने के काम में लगे हैं। अब वह गुलाब के फूलों की खेती करने पर विचार करने लगे हैं। रामतीरथ अब भिण्ड जिले के मुख्य पुष्प उत्पादक और निर्यातक बन गये हैं।

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