गेमन पर फिर उठी सीबीआई जांच की मांग

भोपाल, दिसंबर 2012/ राजधानी के व्‍यस्‍ततम इलाके न्‍यूमार्केट में गैमन इंडिया को शापिंग सह आवासीय काम्‍प्‍लेक्‍स बनाने के लिए जमीन देने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मध्‍यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा है कि पंद्रह एकड़ सरकारी जमीन गेमन इंडिया कंपनी को देकर सरकारी खजाने को पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान पहुंचाया गया है। जब तक इस डील की सीबीआई जांच नहीं हो जाती तब तक इस प्रोजेक्ट को रोका जाना चाहिए।

श्री सिंह ने मीडिया से चर्चा में कई दस्‍तावेज जारी करते हुए कहा कि सरकार ने इस संबंध में विधानसभा में भी गलत जानकारी दी। जबकि सरकार ने खुद कंपनी को फ्री होल्ड करने संबंधी पत्र लिखा था। गैमन को काम देने के निर्णय और दीपमाला इंफ्रास्ट्रक्चर नामक कंपनी को गलत बताते हुए उन्‍होंने कहा कि दीपमाला गैमन इंडिया की एसपीव्ही (स्पेशन परपज व्हेकल) नहीं है। सरकारी जमीन देने के बदले इसमें सरकारी हिस्सा रखने की शर्त भी गैमन के लिए हटा ली गई है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने पिछले विधानसभा चुनाव में गैमन इंडिया के पैसे का भी उपयोग किया है। कांग्रेस आगामी चुनाव में भ्रष्टाचार के मु्द्दे में इसे भी शामिल करेगी।

निहित स्वार्थों का औजार बनी कांग्रेस

इस मामले पर सरकार की ओर से प्रतिक्रिया देते हुए आवास मंत्री और प्रवक्‍ता डॉ नरोत्तम मिश्रा ने नेता प्रतिपक्ष के आरोपों को असत्य और भ्रामक बताते हुए आरोप लगाया कि श्री सिंह अनर्गल आरोपों के फेर में पड़कर निहित स्वार्थों  का औजार बन गए हैं। रिडेन्सिफिकेशन योजना में लीज रेंट शून्य रखने की नीति वर्ष 2002 यानी कांग्रेस शासन के समय से ही लागू है। जमीन का प्रीमियम भी ओपन टेंडर से हुआ इससे जमीन की पूरी बाजार कीमत मिली। 15 एकड़ भूमि का कलेक्टर गाइड लाइन अनुसार मूल्य 82 करोड़ था तथा गेमन इंडिया ने 338 करोड़ की राशि का भुगतान किया।

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