जीविकोपार्जन के साथ जीने की कला भी सीखें: राज्‍यपाल

इंदौर, फरवरी 2013/ राज्यपाल रामनरेश यादव ने कहा है कि जीविकोपार्जन के साथ जीवन जीने की कला भी सीखी जाना महत्वपूर्ण है। व्यक्ति के बाह्य विकास के साथ आंतरिक विकास भी समग्रता के लिये जरूरी है। युवा धर्मनिरपेक्षता एवं सामाजिक न्याय के मूल्यों को सही मायने में आत्मसात करें तथा हमारी लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने के लिये आगे आयें। राज्‍यपाल इंदौर में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के पाँचवें दीक्षांत समारोह को सम्बोधित कर रहे थे।

दीक्षांत समारोह में वर्ष 2010 के 74 विद्यार्थी को 112, वर्ष 2011 के 70 विद्यार्थी को 102 पदक वितरित किए गये। साथ ही 19 विद्यार्थी को पीएच.डी. डिग्री अवार्ड की गयी। वर्ष 2010 के लिये कुमारी वाणी भराणी को एम.बी.बी.एस. में 11 स्वर्ण और 3 रजत पदक दिये गये। वर्ष 2011 में राहुल माथुर को 7 स्वर्ण तथा 2 रजत पदक तथा कुमारी फातिमा अलीराजपुरवाला को 4 स्वर्ण और एक रजत पदक प्रदान किए गए। राज्यपाल ने 14 पदक प्राप्त करने वाली कुमारी वाणी भराणी का सम्मान राजभवन में करने की बात कही।

राज्यपाल ने कहा कि प्राप्त ज्ञान और कौशल का उपयोग जीवन को समृद्ध बनाने के साथ देश और समाज के हित एवं विकास में भी किया जाये। यही सही मायने में गुरुओं की गुरु-दक्षिणा होगी।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. हरि गौतम ने कहा कि लगभग एक करोड़ 50 लाख विद्यार्थी देश के 634 विश्वविद्यालय और लगभग 33 हजार महाविद्यालय में अध्ययनरत है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नामांकन एवं गुणवत्ता बढ़ाने के लिये केन्द्र और राज्य सरकार के प्रयासों के साथ आम जनमानस के प्रयासों की भी आवश्यकता है।

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