टंकी गिरने के मामले पर विधानसभा में हंगामा

भोपाल, दिसंबर 2012/ राजधानी में 19 नवंबर की रात साईंबाबा नगर की पानी की टंकी गिरने की घटना को लेकर विधानसभा में भारी हंगामा हुआ। इस घटना में सात लोग मारे गए थे। कांग्रेस के आरिफ अकील और अन्‍य विधायकों ने ध्‍यानाकर्षण के जरिए यह मामला सदन में उठाया था और इसस पर विपक्ष के साथ साथ सत्‍ता पक्ष के तीखे सवालों ने नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर को परेशान कर दिया। गौर पूरे मामले पर भोपाल नगर निगम के अफसरों का बचाव करते नजर आए। उन्‍होंने कहा कि टंकी में कोई खोट नहीं थी, उसके आसपास रहने वाले लोगों के रोजमर्रा के कामों का पानी बहकर नींव में जाता रहा जिससे वह कमजोर हो गई और यही उसके गिरने का कारण बना। गौर ने अफसरों का बचाव करते हुए कहा कि जांच चल रही है और जब तक उसकी रिपोर्ट नहीं आ जाती यही माना जाना चाहिए कि अफसर इस मामले में क्‍लीन हैं। गौर के जवाब से नाराज होकर कांग्रेसी सदस्‍यों ने सदन से बहिर्गमन भी किया।

ध्यानाकर्षण सूचना देने वाले कांग्रेस के आरिफ अकील,डॉ. गोविंद सिंह और भाजपा के विश्वास सारंग ने इस मामले में कई सवाल उठाए। भाजपा के ध्रुवनारायण सिंह ने भी मंत्री से सवाल पूछे। अकील ने जानना चाहा कि पानी की टंकी से कितनी दूरी पर मकानों के पट्टे दिये गये थे। टंकी का रखरखाव सिविल इंजीनियर कर रहे थे या मैकेनिकल। नियमों को दरकिनार कर टंकी के समीप स्कूल निर्माण की अनुमति कैसे मिली। भाजपा के विश्वास सारंग ने पूछा कि पास की ही टंकी जब जर्जर नहीं थी तो उसे तोड़ा क्यों गया। ध्रवनारायण सिंह ने जानना चाहा कि यदि पानी की वजह से टंकी कमजोर होकर गिरी तो नदियों पर बने पुल कैसे टिके रहते हैं।

सदस्‍यों ने जवाब देने के गौर के तरीके पर भी आपत्ति की। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा कि इस मामले को सरकार हंसी में टाल रही है यह ठीक नहीं है। उन्होंने पीडित परिवारों को दस दस लाख मुआवजा और मकान देने की मांग की। लेकिन गौर ने कहा कि ढाई ढाई लाख का मुआवजा दिया जा चुका है और वह पर्याप्‍त है।

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