तीन सालों में कम हुआ अंधियारा, लौटी खुशियों की रोशनी

प्रदेश के संभागीय, जिला, तहसील मुख्यालयों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में गत तीन वर्ष में निर्धारित अवधि से लगातार अधिक विद्युत प्रदाय किया गया। इसके साथ ही विगत तीन वर्ष में विद्युत प्रदाय की स्थिति में सुधार लाया जाकर प्रत्येक वर्ष की तुलना में ज्यादा बिजली उपभोक्ताओं को प्रदाय की गई। वित्तीय वर्ष 2011-12 में गत वर्ष की तुलना में 11 प्रतिशत अधिक विद्युत प्रदाय किया गया। माली साल में 43 हजार 46 मिलियन यूनिट तथा अगले माली साल में 52 हजार 148 मिलियन यूनिट विद्युत प्रदाय के निर्धारित लक्ष्य की पूर्ति के लिये इन दो वर्ष में लगभग 5 हजार मेगावॉट उत्पादन क्षमता बढ़ाने का कार्यक्रम हाथ में लिया गया है।

 

विद्युत नियामक आयोग द्वारा वर्ष 2009-10, 2010-11 तथा वर्ष 2011-12 के लिये संभागीय, जिला, तहसील मुख्यालयों एवं ग्रामीण क्षेत्रों के लिये क्रमशः 22, 19, 14 तथा 12 घंटे विद्युत प्रदाय की समयावधि निर्धारित की गई थी। इसके विरुद्ध इन तीन वर्ष में निर्धारित अवधि से लगातार ज्यादा विद्युत प्रदाय किया गया है। संभागीय मुख्यालय पर वर्ष 2009-10 में 22.56 घंटे, वर्ष 2010-11 में 22.49 घंटे तथा वर्ष 2011-12 में 23.11 घंटे विद्युत का प्रदाय किया गया। जिला मुख्यालय पर वर्ष 2009-10 में 20.44 घंटे, वर्ष 2010-11 में 20.32 घंटे तथा वर्ष 2011-12 में 21.39 घंटे, तहसील मुख्यालय पर इस दौरान क्रमशः 15.39 घंटे, 15.01 तथा 17.12 और ग्रामीण क्षेत्र में क्रमशः 12.09, 11.15 तथा 13.15 घंटे विद्युत का प्रदाय किया गया।

 

इसी प्रकार विगत तीन वर्ष में किये गये विद्युत प्रदाय में वर्ष 2009-10 में 35 हजार 563 मिलियन यूनिट विद्युत का प्रदाय किया गया। वर्ष 2010-11 में 38 हजार 799 मिलियन यूनिट तथा वर्ष 2011-12 में 43 हजार 46 मिलियन यूनिट विद्युत प्रदाय की गई। पूर्व वर्ष की तुलना में वर्ष 2010-11 में 9 प्रतिशत की वृद्धि तथा वर्ष 2011-12 में 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।वित्तीय वर्ष 2011-12 में 484 मेगावॉट अतिरिक्त क्षमता वृद्धि की गई है। वर्तमान में राज्य की विद्युत उपलब्धता, केन्द्रांश को मिलाकर कुल 9557 मेगावॉट है। वर्ष 2012-13 तथा वर्ष 2013-14 में क्रमशः 1859 मेगावॉट तथा 2883 मेगावॉट विद्युत उत्पादन क्षमता में वृद्धि के लक्ष्य की पूर्ति के लिये परियोजनाओं का कार्य प्रगति पर है।

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