दुष्कर्म के प्रकरण में दस दिन में फैसला

खंडवा, फरवरी 2013/ खण्डवा जिले में नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में मात्र दस दिन की अवधि में दोषियों को सजा सुना दी गई है। जिले में दुष्कृत्य के प्रकरण में त्वरित न्याय का यह दूसरा फैसला है। वर्तमान प्रकरण में नाबालिग के अपहरण व उसके साथ दुष्कर्म मामले में आरोपी कपिल प्रेमलाल (22) तथा सह आरोपी (26) के विरूद्ध विशेष न्यायालय में आरोप तय हुए थे। प्रकरण की सुनवाई 2 से 6 फरवरी के बीच की गई।

अभियोजन के अनुसार 6 दिसम्बर, 2012 को ग्राम गोमुख से कपिल 13 वर्षीय बालिका अगवाकर ले गया था। उसने पीड़िता को अपने जीजा किशोर के घर आशापुर और सूरज के घर नागोतार में छुपाकर रखा। आरोपी कपिल ने बालिका से दुष्कर्म भी किया। पीड़िता के परिजनों की शिकायत पर खालवा पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर हरसूद के न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी संजय गुप्ता की अदालत में चालान पेश किया। यह मामला सत्र (विशेष न्यायालय) में 28 जनवरी को कमिट हुआ।

न्यायाधीश जगदीश बाहेती ने कपिल के विरूद्ध भादवि धारा 363, 366, 376 और लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम की धारा 6 के आरोप निर्धारित किए। सह आरोपी किशोर और सूरज के विरूद्ध धारा 363, 366, 368 व 6/17 के आरोप तय हुए।

6 फरवरी को जिला सत्र न्यायाधीश श्री बाहेती ने अभियुक्त कपिल उर्फ मुकेश कोरकू को आई.पी.सी. की धारा 363 के तहत तीन वर्ष व एक हजार रुपये का जुर्माना तथा लैंगिक अपराधों से संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 6 के तहत 10 साल की सजा व 5000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। अन्य को बरी कर दिया गया। दोनों सजाएँ साथ-साथ चलेंगी।

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