नदी संरक्षण में विश्वविद्यालयों की भूमिका तय होगी

भोपाल, जनवरी 2013/ उच्च शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने कहा है कि नदी संरक्षण में विश्वविद्यालयों की भूमिका के लिए दीर्घकालीन रणनीति बनायी जाएगी। श्री शर्मा ने यहाँ तृतीय अंतर्राष्ट्रीय नदी महोत्सव 2013 में भागीदारी के संबंध में एक उच्च स्तरीय बैठक में अधिकारियों को योजना बनाने के निर्देश दिए। बैठक में सांसद एवं नदी महोत्सव के संयोजक अनिल माधव दवे विशेष रूप से उपस्थित थे।

श्री शर्मा ने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय नदी महोत्सव में नर्मदा अंचल के विश्वविद्यालय जबलपुर, भोपाल, इंदौर से संबद्ध महाविद्यालयों की भागीदारी होगी। महाविद्यालयों और विद्यार्थियों का चयन शीघ्र कर लिया जाएगा। महोत्सव के निष्कर्षों के आधार पर सभी विश्वविद्यालय नदी संरक्षण की कार्ययोजना पर अमल करेंगे।

नदी महोत्सव के संयोजक श्री दवे ने बताया कि एशिया में मध्यप्रदेश ऐसा राज्य है जहाँ अन्तर्राष्ट्रीय नदी महोत्सव आयोजित किया जाता है। इस वर्ष 8 से 10 फरवरी तक महोत्सव होशंगाबाद जिले के बान्द्राभान में होगा। महोत्सव की थीम ’’हमारी नदियाँ नीति, नियम और नेतृत्व’’ रहेगा। नदियों में बदलाव सभी को प्रभावित करता है। नदी संरक्षण का कार्य समाज ही कर सकता है। सरकार की भूमिका इसमें सलाहकार की हो सकती है। तीन दिवसीय महोत्सव में पहले दिन नीति, दूसरे दिन नियम और तीसरे दिन नेतृत्व पर चर्चा कर निष्कर्ष निकाले जायेंगे। नेतृत्व में प्रशासनिक, राजनैतिक, धार्मिक और आर्थिक सभी क्षेत्र शामिल होंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री को नदियों की स्थिति की सतत् मॉनिटरिंग के लिए नदी आयुर्विज्ञान संस्थान बनाने का सुझाव दिया है। प्रसन्नता की बात है कि इस दिशा में प्रोजेक्ट तैयार करवाया जा रहा है।

सचिव उच्च शिक्षा जे.एन. कंसोटिया ने नदी संरक्षण को पाठ्यक्रम में शामिल करने और शोध को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। बैठक में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल, देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय इंदौर, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर, राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय भोपाल, माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल के कुलपति और नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी भोपाल के निदेशक ने भी अपने सुझाव दिये।

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