नर्मदा घाटी सिंचाई परियोजनाओं से 1.81 लाख हेक्टेयर सिंचित

भोपाल, फरवरी 2013/ नर्मदा घाटी के दूरस्थ अंचलों में खेती-किसानी का माहौल तेजी से बदल रहा है। कई क्षेत्र में नहरों से नर्मदा का जल पहली बार पहुँचने से किसानों ने नर्मदा जल की पूजा-अर्चना कर रबी सीजन में अपने खेतों में सिंचाई का शुभारंभ किया। चालू रबी सीजन में किसानों को वास्तविक रूप से सिंचाई जल उपलब्ध करवाने के लक्ष्य पर ध्यान देते हुए जनवरी 2013 तक 1 लाख 81 हजार 875 हेक्टेयर रकबा सिंचित किया जा चुका है। जिस तेजी से सिंचाई रकबा बढ़ रहा उससे मार्च तक कुल सिंचित रकबा बढ़ कर 2 लाख हेक्टेयर से अधिक हो जाएगा।

नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष के.एल. अग्रवाल का कहना है कि परियोजनाओं से बनाई गई सिंचाई क्षमता का वास्तविक लाभ खेतों तक पहुँचाने पर विशेष ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है। इसके तहत निर्माणाधीन परियोजनाओं की जितनी नहर प्रणाली निर्मित हो गई है उतने में जल प्रवाहित किया जा रहा है ताकि उस क्षेत्र के किसान सिंचाई का लाभ लेना आरंभ कर दें। इस पहल के अन्तर्गत गत दिनों मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खरगोन जिले में इंदिरा सागर परियोजना की मुख्य नहर में 141 किलोमीटर से जल प्रवाह का शुभारंभ किया जो 155 किलोमीटर तक प्रवाहित हो रहा है। इस जल प्रवाह से अंचल के सैकड़ों किसानों ने पहली बार सिंचाई जल का लाभ उठाया। अंचल के ग्राम बिलवा के गरीब किसान जोगीलाल भिलाला की गरीबी उनके पहनावे से झाँकती है लेकिन आँखों में खेत में बह रहे नर्मदा जल की चमक स्पष्ट देखी जा सकती है। जोगीलाल बताते हैं कि ढाई एकड़ खेत में अब तक बिना पानी की ज्वार, मक्का ही लेकर गरीबी में दिन काट रहे थे। जमीन के इस टुकड़े पर उनके दो विवाहित लड़के और उनकी चार संतान भी आश्रित हैं। मजदूरी करना ही परिवार की मजबूरी बनी हुई थी। नर्मदा का जल आ जाने से पहली बार गेहूँ बोया है। उन्हं भरोसा है कि नर्मदा आ जाने से अब मजदूरी पर नहीं जाना पड़ेगा।

ग्राम नवलपुरा के किसान अमर सिंह भिलाला, ग्राम बारदेवला के किसान गेंदालाल पटेल, ग्राम साडली के किसान तिलोक, जैसे सैकड़ों छोटी जोत के किसानों का आत्म-विश्वास इस जल से बुलन्दी पर है। युवा तिलोक शर्त लेने को तैयार हैं कि वह पथरीली एवं सूखी जमीन के अपने डेढ़ एकड़ रकबे से अब 15 क्विंटल गेहूँ पैदा कर बताएगा। ज्ञात हो कि नर्मदा घाटी की निर्मित और पूर्णता की ओर अग्रसर परियोजनाओं से जनवरी 2013 तक 3 लाख 72 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता बनी है। इस क्षमता पर वर्ष 2012-13 में 2 लाख 23 हजार हेक्टेयर रकबे को वास्तविक रूप से सिंचित करने का लक्ष्य रखा गया है।

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