पन्ना बाघ पुर्नस्थापना एक उत्कृष्ट उदाहरण

भोपाल, दिसम्बर 2014/ पन्ना टाइगर रिजर्व में आज जश्न का माहौल है। आज से पाँच वर्ष पूर्व रिजर्व प्रबंधन ने 30 दिन के अथक प्रयास के बाद 26 दिसम्बर, 2009 को बाघ टी-3 को पुन: पार्क में लाने में कामयाबी हासिल की थी। एक समय बाघ विहीन हो चुके पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ का कुनबा बढ़ाने का श्रेय बाघ टी-3 को ही जाता है। पन्ना टाइगर रिजर्व के अधिकतर बाघों के कुनबे का पिता टी-3 है। पार्क प्रबंधन टी-3 को प्यार से ‘मिस्टर पन्ना’ के नाम से पुकारता है और 26 दिसम्बर को टी-3 दिवस के रूप में पुर्नस्थापना  की वर्षगाँठ मनाता है। क्षेत्र संचालक श्री आर. कृष्णमूर्ति ने आज बाघ पुर्नस्थापना  में योगदान देने वाले 450 कर्मचारी और अधिकारी को प्रतीक-चिन्ह देकर सम्मानित किया। पन्ना की बाघ पुर्नस्थापना योजना आज देश ही नहीं विश्व में उदाहरण बन चुकी है।

बाघ शून्य हो चुके पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ पुर्नस्थापना  के लिये बाघ टी-3 को नवम्बर, 2005 में पेंच टाइगर रिजर्व से लाया गया था। नये माहौल में सामंजस्य न बिठा पाने के कारण टी-3 बाघ 25 नवम्बर, 2005 को रिजर्व से अपना घर खोजते हुए बाहर निकल गया। टी-3 के 30 दिन के इस भटकाव ने देश-विदेश के वन्य-प्राणी विशेषज्ञों को इतना ज्ञान दिया, जो आज मिसाल बन चुका है। यह बाघ रेडियो कालरयुक्त था, परन्तु इस तकनीक की अपनी सीमाएँ थीं। टी-3 बाघ पन्ना की दक्षिण दिशा में छतरपुर, सागर एवं दमोह जिले में विचरण करते हुए 442 किलोमीटर चला। उसके लिये भौगोलिक क्षेत्र नया था और शिकार होने से खुद को बचाना भी बड़ी चुनौती थी। पन्ना पार्क प्रबंधन ने चुनौती से हार नहीं मानी। चार हाथी के साथ 70 अधिकारी-कर्मचारी की टीम बाघ की निगरानी-सुरक्षा में दिन-रात लगी रही। अन्तत: 30 दिन के अथक परिश्रम के बाद यह टीम टी-3 बाघ को बेहोश कर 26 दिसम्बर, 2009 को पुन: पार्क में मुक्त करने में सफल रही। ये कोशिशें आज पन्ना बाघ पुर्नस्थापना  रणनीति के नाम से जानी जाती है।

पन्ना टाइगर रिजर्व के अधिकतर बाघों के कुनबे का पिता टी-3 है। अब तक हुई इसकी 14 संतान में से 32 से अधिक बाघ शावक जन्म ले चुके हैं। इन शावकों में से 6 की मृत्यु हो गई, जबकि 7 बाघ सम्पूर्ण बुन्देलखण्ड क्षेत्र में स्वच्छन्द विचरण कर रहे हैं। वर्तमान में पार्क में 22 बाघ का कुनबा है। टी-3 की यात्रा में पन्ना टाइगर रिजर्व एवं नौरादेही बाघ कॉरीडोर की खोज हुई। इसके अतिरिक्त पन्ना-212 ने इतिहास रचते हुए पन्ना-बाँधवगढ़-संजय टाइगर रिजर्व के कॉरीडोर की खोज की एवं संजय टाइगर रिजर्व में बाघिन के साथ जोड़ा बनाकर बाघ संख्या बढ़ाई।

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