परंपरागत रूप से हुई तानसेन समारोह की शुरूआत

ग्‍वालियर, दिसंबर 2012/ प्रतिष्ठापूर्ण तानसेन समारोह की यहाँ हजीरा स्थित तानसेन समाधि-स्थल पर शहनाई वादन, हरिकथा, मिलाद, चादरपोशी और कव्वाली गायन के साथ परंपरागत शुरूआत हुई। सुर सम्राट तानसेन की स्मृति में पिछले 88 वर्ष से हो रहे समारोह में इस साल ब्रह्मनाद के शीर्षस्थ साधक तानसेन समाधि-परिसर से तानसेन को स्वरांजलि अर्पित कर रहे हैं।

शुक्रवार को भोर में तानसेन समाधि-स्थल पर परंपरागत ढंग से तानसेन समारोह की शुरूआत में उस्ताद मजीद खाँ ने शहनाई वादन किया। इसके बाद नाथपंथी संत श्रीकांतनाथ ढोली बुआ महाराज ने संगीतमय आध्यात्मिक प्रवचन में ईश्वर और मनुष्य के रिश्तों को उजागर किया। उन्होंने कहा कि अल्लाह और ईश्वर, राम और रहीम, कृष्ण और करीम, खुदा और देव सब एक हैं। हर मनुष्य में ईश्वर विद्यमान है। उन्होंने कहा कि रोजा और व्रत, मुल्ला और पण्डित, ख्वाजा और आचार्य के उद्देश्य और मत एक ही है कि सभी नेकी के मार्ग पर चलें।

इसके बाद मौलाना मोहम्मद यासीन खाँ और आर. ए. फिरदौसी तथा अन्य साथियों ने मिलाद शरीफ का गायन किया। इस मौके पर हजरत मोहम्मद गौस के वंशज नैयर अहमद शतारी-अतारी अहमदाबाद और गुजरात से ही पधारे खलीफा तनवीर आलम सहित अन्य प्रबुद्ध जन मौजूद थे। अंत में हजरत मौहम्मद गौस और तानसेन की मजार पर परंपरागत ढंग से चादरपोशी की गई। चादरपोशी की रस्म श्री कामिल हजरत जी ने निभाई। इससे पहले जनाब फरीद खानूनी, अख्तर वासरी, सैफ कादरी, मुन्ना खाँ और मोहम्मद शेखू कव्वाली गायन करते हए चादर लेकर पहुँचे ।

ग्वालियर का तानसेन समारोह प्रदेश सरकार का प्रतिष्ठापूर्ण आयोजन है, जिसकी ख्याति देश ही नही विदेश तक में है। समारोह में जहाँ एक ओर श्रोताओं को संगीत का सच्चा आनंद मिलता है वहीं सांस्कृतिक एकता, साम्प्रदायिक सद्भाव, समन्वय और बन्धुत्व का विस्तार भी होता है।

राज्य शासन की उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी एवं मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद के तत्वावधान में ’‘तानसेन समारोह’‘ इस बार 14 से 17 दिसम्बर तक हो रहा है। समारोह में कुल छः संगीत सभा होगीं। पहली पाँच सभाएँ तानसेन समाधि-स्थल पर सजेगी। अंतिम एवं छठवीं संगीत सभा तानसेन की जन्म-स्थली मुरार जनपद पंचायत के ग्राम बेहट में झिलमिल नदी के किनारे 17 दिसम्बर को प्रातःकाल में होगी।

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