पशुपालकों की आमदनी चौगुनी करने के प्रयास

भोपाल, अक्टूबर 2014/ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रधानमंत्री की लेब-टू-लेंड योजना में जितने भी अत्याधुनिक साधन आये हैं, उनके उपयोग को मध्यप्रदेश में ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा दिया जायेगा। इससे कृषि और पशुपालन में अभूतपूर्व प्रगति होगी। प्रदेश में पशुपालकों की आमदनी चार गुना तक बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं। इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव, किसान-कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री गौरीशंकर बिसेन, स्वास्थ्य राज्य मंत्री शरद जैन उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय, जबलपुर में लेब-टू-लेंड कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। इसका उद्देश्य पशुपालन के क्षेत्र में वैज्ञानिकों द्वारा की जा रही खोज और अनुसंधान का लाभ पशुपालकों और किसानों तक पहुँचाना है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर साँची ब्रांड के तीन नये उत्पाद को औपचारिक रूप से लांच किया। इनमें काजू कतली, रसगुल्ला और गुलाब जामुन शामिल हैं। उन्होंने अधिक दूध उत्पादन वाले देशी नस्ल की गाय के पालकों को राज्य-स्तरीय गोपाल पुरस्कार से भी सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने ‘ज्ञानार्जन’ वेबसाइट का लोकार्पण भी किया।

श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा पशु हैं, लेकिन उनके नस्ल सुधार की आवश्यकता है। फिलहाल प्रदेश के 39 जिले में पशु बीमारियों का अत्याधुनिक विधियों से परीक्षण हो रहा है। शीघ्र ही यह सुविधा सभी जिलों में की जायेगी। उन्होंने कहा कि साँची ब्रांड को अमूल से आगे ले जाना है। यह असंभव नहीं है। इसके लिये सिर्फ अच्छी मार्केटिंग करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हर गाँव में दुग्ध उत्पादन समितियाँ बनेंगी और दुग्ध संघ को अधिक बढ़ावा दिया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि दूध के उत्पादन के साथ-साथ दुग्ध उत्पादों की रेंज भी बढ़ाई जायेगी। आवश्यकता से अधिक दूध की उपलब्धता होने पर दूध पाउडर भी बनाया जायेगा। प्रदेश में पारम्परिक खेती के साथ-साथ जैविक खेती को भी भरपूर बढ़ावा दिया जा रहा है।

पशुपालन मंत्री कुसुम महदेले ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पशुपालन के क्षेत्र में नई विधियों को शुरू किया गया है और इन्हें ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने पशुपालकों को नई विधियाँ अपनाने का सुझाव दिया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति अमरजीत सिंह नंदा, प्रमुख सचिव पशुपालन प्रभांशु कमल और वैज्ञानिक, पशु चिकित्सक एवं बड़ी संख्या में पशुपालक उपस्थित थे।

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