पेंच परियोजना को सभी मंजूरियों के बाद शुरू किया गया

भोपाल, नवंबर 2012/ मध्‍यप्रदेश सरकार ने स्‍पष्‍ट किया है कि छिंदवाड़ा जिले की पेंच व्यपवर्तन परियोजना पर्यावरण सहित सभी प्रकार की स्वीकृतियाँ प्राप्त करने के बाद क्रियान्वित की गई है। परियोजना के डूब क्षेत्र की निजी भूमि अर्जन से प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने के लिए सरकार ने विशेष पैकेज स्वीकृत किया है। योजना पूर्ण होने पर 52 हजार 655 हेक्टेयर में सिंचाई होगी। कुल 1788 करोड़ 72 लाख रुपये लागत की इस परियोजना को जून 2015 तक पूरा किए जाने का लक्ष्य है।

पेंच व्यपवर्तन परियोजना में छिंदवाड़ा जिले के चौरई विकासखण्ड के ग्राम माचागौरा में निर्माणाधीन बाँध में 577 एमसीएम जल संग्रहीत होगा। इसमें से जीवित जल ग्रहण क्षमता 407 एमसीएम होगी। छिंदवाड़ा और चौरई विकासखण्ड के 108 गाँव और सिवनी जिले के सिवनी और छपरा विकासखण्डों के 134 गाँव में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। परियोजना की दायीं तट नहर से 8,895 हेक्टेयर और बायीं तट नहर से 47 हजार 760 हेक्टेयर में सिंचाई होगी। इस प्रकार परियोजना से कुल 52 हजार 655 हेक्टेयर जमीन को पानी मिलेगा।

बाँध में उद्योगों के 62 एमसीएम जल का प्रावधान किया गया है। इससे औद्योगिक विकास होगा और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। परियोजना का शीर्ष कार्य 12 प्रतिशत और मुख्य नहर का 45 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।

पेंच परियोजना के जलाशय के डूब क्षेत्र की निजी भूमि के अर्जन से प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने के लिए सरकार ने विशेष पैकेज स्वीकृत किया है। कलेक्टर गाइडलाइन 2011-12 में विगत वर्षों की तुलना में डूब क्षेत्र के 30 गाँव में कृषि भूमि की दर 204 प्रतिशत तक बढ़ायी गई है। औसत वृद्धि 80 प्रतिशत रही है। राज्य सरकार ने डूब क्षेत्र के किसानों को वर्ष 2011-12 की कलेक्टर गाइडलाइन की दर से 301 करोड़ 2 लाख रुपये का विशेष पैकेज स्वीकृत किया है।

उल्लेखनीय है कि पेंच व्यपवर्तन परियोजना के तकनीकी और अन्य पहलूओं का भारत सरकार के केन्द्रीय जल आयोग ने विस्तृत परीक्षण कर 1988 में इसे स्वीकृति दी। भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं वन्य जीव मंत्रालय द्वारा परियोजना को अप्रैल 1986 में पर्यावरण स्वीकृति दी गई। परियोजना का निर्माण कार्य पर्यावरण स्वीकृति के बाद 1988 में शुरू किया गया।

परियोजना को केन्द्रीय जल संसाधन मंत्रालय की तकनीकी सलाहकार समिति ने फरवरी 2006 में पुनः तकनीकी और वित्तीय स्वीकृति दी। केन्द्रीय योजना आयोग ने अप्रैल 2006 में परियोजना में निवेश की अनुमति दी। परियोजना भारत सरकार के त्वरित सिंचाई कार्यक्रम (एआईबीपी) में स्वीकृत है। इसकी 25 प्रतिशत लागत केन्द्रीय अनुदान के रूप में प्राप्त हो रही है।

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