पौने तेरह लाख बालिकाएँ बनी लखपति

भोपाल, दिसंबर 2012/ मध्यप्रदेश में बेटियों को अपने जीवन की शुरूआत में ही लखपति बनने का अवसर मिल रहा है। प्रदेश में बिगड़े लिंगानुपात को सुधारने की दिशा में लाड़ली लक्ष्मी जैसी अनेक योजनाएँ क्रियान्वित की जा रही हैं। मध्यप्रदेश की पहचान एक ऐसे राज्य की बन चुकी है, जहाँ बेटियों के भविष्य की न केवल चिंता की जा रही है बल्कि उनके लिये अनेक योजनाएँ भी चलाई जा रही है। साढ़े पाँच साल पहले मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर शुरू हुई लाड़ली लक्ष्मी योजना की निरंतर हो रही मॉनीटरिंग और क्रियान्वयन का ही परिणाम है कि अब तक 12 लाख 72 हजार 759 बालिकाएँ लाड़ली लक्ष्मी बन चुकी हैं।

मध्यप्रदेश में लाड़ली लक्ष्मी योजना से लाभान्वित हुई सबसे अधिक 2 लाख 64 हजार 904 बालिकाएँ जबलपुर संभाग की है। दूसरे क्रम में इन्दौर संभाग की 2 लाख 7 हजार 403 बालिकाएँ तथा तीसरे स्थान पर रहे उज्जैन संभाग में एक लाख 51 हजार 508 बालिकाओं को इस योजना का लाभ मिला है। इसके बाद सागर संभाग रहा, जहाँ योजना से लाभान्वित होने वाली बालिकाओं की संख्या एक लाख 34 हजार 418 रही।

अन्य संभागों के क्रम में भोपाल संभाग में एक लाख 27 हजार 881, ग्वालियर में एक लाख 646, रीवा में 97 हजार 694, नर्मदापुरम् में 66 हजार 425, शहडोल संभाग में 61 हजार 150 और चम्बल संभाग में 60 हजार 730 कन्याओं को इस योजना का लाभ मिला है।

लाड़ली लक्ष्मी योजना का लाभ उठाने में जिला स्तर पर छिन्दवाड़ा जिला अग्रणी रहा है, जहाँ अब तक 57 हजार 271 बालिकाएँ लाभान्वित हुई हैं। जबलपुर जिला दूसरे स्थान पर रहा, जहाँ 56 हजार 17 बालिकाओं ने लाभ उठाया। इन्दौर जिले में 49 हजार 588, सागर जिले में 48 हजार 544, बालाघाट जिले में 43 हजार 406, भोपाल जिले में 42 हजार 668, धार जिले में 42 हजार 86, सतना जिले में 40 हजार 29, बैतूल जिले में 34 हजार 748 और सिवनी जिले में 33 हजार 603 बालिकाओं को पिछले साढ़े पाँच साल में लाड़ली लक्ष्मी योजना का लाभ मिला है।

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