प्रदेश की कृषि विकास दर 18 प्रतिशत हुई

भोपाल, जनवरी 2013/ मध्यप्रदेश में वर्ष 2012 में कृषि के क्षेत्र में अनेक उपलब्धियाँ अर्जित की गई हैं। भारत सरकार द्वारा ग्यारहवीं पंच-वर्षीय योजना के लिये कृषि क्षेत्र की विकास दर का लक्ष्य 4 प्रतिशत रखा गया था, जिसके विरुद्ध मध्यप्रदेश में कृषि विकास दर वर्ष 2011-12 में 18 प्रतिशत रही।

प्रदेश की समग्र फसलों का कुल उत्पादन वर्ष 2011-12 में 302.13 लाख मीट्रिक टन और समग्र फसलों की औसत उत्पादकता इसी अवधि में 1410 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हुई। अनुसूचित जाति एवं जनजाति के कृषकों को 90 प्रतिशत अनुदान पर संकर मक्का बीज का वितरण कर खरीफ वर्ष 2012 में 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में संकर मक्का का विशेष कार्यक्रम हाथ में लिया गया। वर्ष 2012 में ही बीज की उपलब्धता में वृद्धि के लिए बीज उत्पादक सहकारी समितियों का वृहद पैमाने पर गठन करने वाला मध्यप्रदेश देश का प्रथम राज्य बना।

खेती को लाभकारी धंधा बनाया

कृषि केबिनेट का गठन करने वाला देश का पहला प्रदेश बना। कृषि केबिनेट में कृषि, उद्यानिकी, सिंचाई, मत्स्य-पालन, पशुपालन, विद्युत, कृषि विपणन आदि विषयों पर विचार-विमर्श किया जाता हैं।

कृषि केबिनेट के निर्णय के पालन में कृषि क्षेत्र के आर्थिक परिदृश्य का सर्वेक्षण करवाया गया। इस प्रकार का सर्वेक्षण करने वाला मध्यप्रदेश प्रथम राज्य हैं। कृषि केबिनेट के निर्णय अनुसार ही प्रदेश के 9 संभाग में नवीन बीज परीक्षण प्रयोगशाला और 6 संभाग में नवीन उर्वरक गुण नियंत्रण प्रयोगशाला की स्थापना होने वाली है।

कृषि तकनीक का प्रसार

किसानों को नवीन कृषि तकनीक की जानकारी देने के प्रयासों में इसी अवधि में गति आई। अधिक और कम वर्षा का प्रभाव कम करने के लिए सोयाबीन में रिज एण्ड फरो पद्धति के उपयोग को बढ़ावा देने चालू माली साल में 22 लाख हेक्टेयर में विशेष कार्यक्रम शुरू किया गया। वन के क्षेत्र में अधिक उत्पादन के लिए एस.आर.आई. पद्धति के लिये वर्ष 2012-13 में 3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष कार्यक्रम प्रारंभ किया गया।

कल्याणकारी कदम

मध्यप्रदेश वर्ष 2012 में कृषकों के बैंक खाते में शासकीय अनुदान का सीधा भुगतान करने वाला देश का पहला प्रदेश बना। इससे किसानों को शीघ्र और सरल तरीके से अनुदान योजनाओं का लाभ मिलना सरल हुआ।

बैल-चलित कृषि यंत्रों, स्प्रिंकलर, रैन गन और ड्रिप इरीगेशन के अलावा बायोगैस संयंत्र आदि आदानों पर केन्द्रीय योजनाओं में अनुदान के अतिरिक्त राज्य शासन द्वारा अतिरिक्त अनुदान का प्रावधान किया गया है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के कृषकों के लिए नलकूप खनन और पंप स्थापना पर दिया जाना वाला अनुदान 25000 से बढ़ाकर 40000 रुपये किया गया।

अनुदान पर दिये जाने वाले कृषि यंत्रों को किसानों को अपनी पसंद और जरूरत के अनुरूप सीधे बाजार से क्रय करने की छूट दी गई। हलधर योजना के माध्यम से पड़त भूमि को कृषि योग्य बनाने के लिए प्रति हेक्टेयर अनुदान 1000 से बढ़ाकर 1500 किया गया। उर्वरक की अग्रिम भण्डारण योजना का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया गया। इससे किसानों द्वारा 300 करोड़ रुपए की बचत की गई। किसानों को किराये पर महँगे कृषि यंत्र उपलब्ध करवाने के लिए 850 कस्टम हायरिंग केन्द्र इसी अवधि में संचालित हुए। किसानों को नवीन तकनीक की जानकारी इंटरनेट के माध्यम से निःशुल्क उपलब्ध करवाने की व्यवस्था के अंतर्गत देश की पहली हिन्दी की कृषि वेबसाइट भी इसी साल बनाई गई।

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