प्रदेश की पारेषण क्षमता 12 हजार 600 मेगावॉट हुई

भोपाल, जनवरी 2016/ मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी के लिए यह वर्ष उपलब्धियों से भरा रहा है। काउंसिल ऑफ पावर यूटिलिटी द्वारा 8वें इंडिया पावर अवार्डस्-2015 के अंतर्गत पावर ट्रांसमिशन कंपनी के 400 के.व्ही. सतपुड़ा-आष्टा पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप ट्रांसमिशन परियोजना को रिमार्केबल प्रोजेक्ट्स अवार्डस मिला है। इन उपलब्धियों के साथ ही आज की स्थिति में कंपनी के अति उच्च-दाब उप-केन्द्रों की ट्रांसफार्मेशन क्षमता 48681 एमवीए, अति उच्च-दाब लाइनों की कुल लंबाई 31084.04 सर्किट किलोमीटर एवं अति उच्च-दाब उप-केन्द्रों की संख्या 309 हो गयी है।

पिछले वित्त वर्ष में पारेषण क्षमता 12 हजार 600 मेगावॉट हो गयी थी, जो कंपनी गठन के समय 3890 थी। इस प्रकार 223 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गयी है। इस वित्त वर्ष में 18 जनवरी तक कंपनी ने कुल 889.06 सर्किट किलोमीटर पारेषण लाइन एवं उप-केन्द्रों की क्षमता में 3224.5 एमवीए की वृद्धि की है। कंपनी के गठन के बाद पारेषण हानि 7.93 से लगातार घटकर वर्ष 2014-15 में 2.82 के अब तक के न्यूनतम स्तर पर पहुँच गयी है। पिछले वित्त वर्ष में पारेषण प्रणाली की उपलब्धता मध्यप्रदेश नियामक आयोग के 98 प्रतिशत के निर्धारित मापदंड से अधिक 99.35 प्रतिशत तक प्राप्त की गयी है। इस वित्त वर्ष के लिये 4493 एमवीए ट्रांसफार्मेशन क्षमता एवं 1036 सर्किट किलोमीटर लाइनों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

कंपनी द्वारा 309 उप-केन्द्र में से 302 अति उच्च-दाब उप-केन्दों को स्काडा प्रणाली से जोड़ा जा चुका है। कंपनी की 3 अति उच्च-दाब लाइन, 28 उप-केन्द्र, भार प्रेषण केन्द्र, 2 टेस्टिंग एवं एचआरडीआई कार्यालयों एवं जबलपुर के स्काडा कंट्रोल सेंटर को अब तक आईएसओ 9001 प्रमाण पत्र प्राप्त हो चुके हैं।

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