प्रधानमंत्री ग्राम-सड़क योजना में 7,200 किमी की नई सड़कें बनेंगी

भोपाल, दिसंबर 2012/ प्रधानमंत्री ग्राम-सड़क योजना में शीघ्र ही मध्यप्रदेश में 7,200 किलोमीटर अतिरिक्त सड़कों के निर्माण के प्रस्तावों को केन्द्र की मंजूरी मिलेगी। मौजूदा माह के अंत तक इसमें से 4,200 किलोमीटर और मार्च, 2013 माह के अंत तक 3000 किलोमीटर सड़कों के निर्माण के प्रस्तावों को मंजूरी दे दी जायेगी। केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने आज यहाँ विभागीय योजनाओं और कार्यक्रमों की समीक्षा के दौरान यह बात कही। बैठक में अपर मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती अरुणा शर्मा के साथ ही केन्द्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

श्री जयराम रमेश ने बताया कि मनरेगा की लम्बित मजदूरी के भुगतान के लिये केन्द्र द्वारा आज ही 100 करोड़ रुपये के आवंटन का आदेश जारी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब मनरेगा के माध्यम से 60:40 के अनुपात में आँगनवाड़ी भवनों का निर्माण किया जा सकेगा। इस फैसले से राज्य में करीब 20 हजार आँगनवाड़ी भवन ग्रामीण अँचलों में बनाने का काम आसान हो गया है। श्री रमेश ने बताया कि मध्यप्रदेश में इंदिरा आवास की जरूरतों को पूरा करने के लिये 300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान भी किया जायेगा।

केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ने समीक्षा बैठक में मनरेगा के कन्वर्जेंस के आधार पर ग्रामीण अँचलों में चल रहे विकास कार्यों के मध्यप्रदेश मॉडल की सराहना की। उन्होंने मनरेगा के जरिये प्रदेश में सर्वाधिक 52 प्रतिशत सार्वजनिक उपयोग की स्थाई परिसम्पत्तियों के निर्माण के काम को भी सराहा, जो देश में सर्वाधिक है। इसके अलावा विकास योजनाओं और आजीविका कार्यक्रमों का लाभ मिलने से ग्रामीणों के जीवन-स्तर में आ रहे बदलाव को भी केन्द्रीय मंत्री ने शुभ संकेत बताया। बैठक में केन्द्रीय मंत्री को ग्रामीण अँचलों में मनरेगा में रोजगार की माँग में निरंतर आ रही कमी के बारे में बताया गया कि कन्वर्जेंस के जरिये कपिलधारा कूप सहित हितग्राहीमूलक योजनाओं और सार्वजनिक उपयोग की परिसम्पत्तियों के निर्माण से गरीब ग्रामीणों की आमदनी बढ़ने से रोजगार की जरूरत निरंतर कम हो रही है। मध्यप्रदेश में निजी कृषि के क्षेत्र में मिलने वाली मजदूरी की दर अधिक होने से मजदूरों का रुझान इस और कम हुआ है। उन्होंने कपिलधारा कूप योजना के बेहतर परिणामों पर आधारित अध्ययन रिपोर्ट को भी प्रकाशित किये जाने की बात कही। श्री रमेश ने मनरेगा में 90 दिन से अधिक की लम्बित मजदूरी के भुगतान की समस्या के समाधान के लिये माइक्रो लेवल पर लगातार समीक्षा की आवश्यकता बताई।

अपर मुख्य सचिव ने बताया कि मध्यप्रदेश देश में एकमात्र ऐसा राज्य है, जहाँ चार्टेड अकाउंटेंट के माध्यम से सभी 23 हजार 12 ग्राम-पंचायत का ऑडिट कराया जा रहा है। मनरेगा के कार्यों की गुणवत्ता के लिये राज्य-स्तर पर मुख्य अभियंता स्तर के एक वरिष्ठ अधिकारी को संचालक गुणवत्ता के पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा 900 से अधिक उप-यंत्रियों को तथा 23 हजार से अधिक रोजगार सहायकों को संविदा नियुक्ति दी गई है। यह सभी कम्प्यूटर शिक्षित हैं और इससे जानकारियों के त्वरित संप्रेषण तथा विकास कार्यों के सुचारु क्रियान्वयन में मदद मिल रही है।

आयुक्त, मनरेगा रवीन्द्र पस्तौर ने बताया कि सामाजिक अंकेक्षण की पारदर्शी व्यवस्था लागू करते हुए वेबसाइट पर सभी ऑडिट कण्डिकाओं को प्रदर्शित किया जा रहा है। इसके अलावा फेसबुक पर भी मध्यप्रदेश में मनरेगा के कार्यों की जानकारी उपलब्ध करवाई जा रही है। मनरेगा शिकायतों के संबंध में काल सेंटर स्थापित किया गया है, जहाँ टोल-फ्री नंबर पर शिकायतें त्वरित दर्ज की जाती है।

प्रधानमंत्री ग्राम-सड़क योजना की प्रगति की समीक्षा के दौरान केंद्रीय मंत्री ने बताया कि योजना का द्वितीय चरण शीघ्र शुरू होगा। इसमें एक अप्रैल, 2014 से मध्यप्रदेश को भी जोड़ा जायेगा। द्वितीय चरण में इस योजना के अंतर्गत पूर्व में बनी सभी पुरानी सड़कों के उन्नयन का काम करवाया जायेगा। सड़कों को चौड़ा करने के साथ ही सड़कों के स्तर को और बेहतर बनाने के काम दूसरे चरण में होंगे।

अपर मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश में 5 वर्ष पुरानी 12 हजार किलोमीटर सड़कों में से 4,115 पुरानी सड़कों के सुधार का काम राज्य सरकार द्वारा सम्पन्न करवाया गया है। 7,200 किलोमीटर नई सड़कों के निर्माण के प्रस्तावों को मंजूरी मिलने पर राज्य के 3 जिलों अनूपपुर, बालाघाट और डिण्डोरी में योजना के प्रथम चरण के सड़क निर्माण के लक्ष्य पूरे हो जायेंगे।

मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान श्री जयराम रमेश ने स्कूलों में भोजन व्यवस्था के लिये डायनिंग शेड निर्माण के प्रस्ताव को भी सैद्धांतिक स्वीकृति दी। उन्होंने जलग्रहण क्षेत्र विकास कार्यक्रम के अंतर्गत 50 फीसदी कार्य स्वयंसेवी संगठनों के माध्यम से करवाने और कार्पोरेट सेक्टर के साथ पीपीपी मोड में कार्यक्रम को क्रियान्वित करने पर भी सहमति जताई।

बैठक में मध्यप्रदेश में संचालित आजीविका कार्यक्रमों और सामाजिक न्याय विभाग के माध्यम से दी जाने वाली पेंशन योजनाओं पर भी चर्चा हुई। इस अवसर पर संयुक्त सचिव ग्रामीण विकास, भारत सरकार राजेश भूषण, निदेशक मनरेगा, भारत सरकार एच.पी. वशिष्ठ, यू.एन.डी.पी की नई दिल्ली स्थित परामर्शदाता श्रीमती मीनाक्षी मांग, आयुक्त पंचायत विश्वमोहन उपाध्याय, सचिव एवं आयुक्त सामाजिक न्याय व्ही.के. बाथम सहित विभागीय अधिकारी बैठक में मौजूद थे।

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