बालिका छात्रावासों की सतत समीक्षा हो

भोपाल, जनवरी 2013/ प्रदेश में संचालित आदिवासी बालिका छात्रावास एवं आश्रमों की व्यवस्था की सतत समीक्षा किये जाने के निर्देश प्रमुख सचिव आदिम-जाति कल्याण प्रेमचंद मीना ने कलेक्टरों एवं जिला अधिकारियों को दिए हैं।

प्रमुख सचिव ने निर्देशों में कहा है कि आदिवासी कन्या शाला-स्तर पर शिक्षकों की समिति गठित कर छात्राओं की शारीरिक एवं मानसिक स्थिति का अध्ययन कर, उन्हें मार्गदर्शन दिया जाए। आवासीय संस्थानों में रहने वाली बालिकाओं का प्रतिमाह स्वास्थ्य परीक्षण कर, उनका हेल्थ-कार्ड रखा जाए। स्वास्थ्य परीक्षण के लिये महिला चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई जाए। बालिका छात्रावासों का चार्ज महिला शिक्षकों के पास ही हो, यह सुनिश्चित किया जाए। छात्रावासों में महिला अधीक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित हो। जब इन छात्रावासों का निरीक्षण प्राचार्य एवं वरिष्ठ अधिकारी करें, तो अनिवार्य रूप से महिला अधीक्षक को भी साथ रखा जाए। कन्या परिसरों में बिजली की पर्याप्त व्यवस्था हो। छात्रावास एवं आश्रमों से जब छात्राएँ खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के लिये बाहर जाती हैं, तो उनके साथ महिला शिक्षकों की ड्यूटी अनिवार्य रूप से लगाई जाए।

प्रमुख सचिव ने यह भी निर्देश दिये हैं कि प्रत्येक महिला आवासीय परिसर में एक रजिस्टर रखा जाये, जिसमें परिसर में आने वाले व्यक्तियों का ब्यौरा रखा जाए। सभी आवासीय संस्था में हेल्प-लाइन नम्बर 1090 दीवारों पर स्पष्ट रूप से लिखा जाए। उन्होंने आवासीय छात्रावास आश्रमों का विकासखण्डवार निरीक्षण रोस्टर तैयार किये जाने के लिये भी कहा है।

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