बाढ़ के खतरे वाले क्षेत्रों में जरूरी व्यवस्थाओं की समीक्षा

भोपाल, जुलाई 2014/ अति वर्षा और बाढ़ की आशंका को ध्यान में रखते हुए आवश्यक तैयारियों के संबंध में मंत्रालय में समीक्षा की गई। अपर मुख्य सचिव और कृषि उत्पादन आयुक्त मदन मोहन उपाध्याय ने निर्देश दिए कि बाढ़ नियंत्रण के लिए नर्मदा घाटी एवं जल संसाधन विभाग ,गृह, स्वास्थ्य, खाद्य, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नगरीय प्रशासन, लोक निर्माण, परिवहन सहित केंद्रीय जल आयोग एवं मौसम विभाग, रेलवे, आकाशवाणी, दूरदर्शन और रेडक्रास द्वारा निर्धारित दायित्वों का निर्वहन किया जाए। श्री उपाध्याय ने कहा कि कि पूर्व वर्ष में इंदौर के निकट पातालपानी में हुए हादसे की तरह कोई और हादसा न हो, इसके लिए आवश्यक ऐहतियात बरतना आवश्यक है। जिलों में पिकनिक स्पाट के पास होमगार्ड तैनात करने एवं निरंतर आवश्यक ध्यान रखने के निर्देश दिए गए। बाँधों के जल-स्तर और बांधों से जल छोड़ने की पूर्व सूचना विभिन्न साधनों से संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों और प्रभावित होने वाले क्षेत्र की जनता को जरूर दी जाए।

अपर मुख्य सचिव ने कहा कि जल संसाधन विभाग जलाशयों एवं बाँधों के जल स्तर की नियमित रुप से सभी संबंधितों को जानकारी दें। राज्य बाढ़ नियंत्रण कक्ष को भी इस संबंध में सूचना दी जाए । अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि चेक लिस्‍ट के अनुसार संबंधित विभाग जरूरी तैयारियाँ करें। बैठक में उपस्थित सेना के प्रतिनिधि अधिकारी ने बताया कि आपदा की स्थिति में नागरिकों की सहायता के लिए सेना सदैव तत्पर रहेगी। बैठक में निर्देश दिए गए कि परिवहन विभाग यात्री वाहनों में ओवरलोडिंग पर नियंत्रण एवं अनफिट वाहनों के संचालन पर रोक लगाएं। लोक निर्माण विभाग पुल और पुलियों पर यातायात नियंत्रण के लिए बेरियर स्थापित करें। बाढ़ की दशा में यातायात रोका जाए एवं चेतावनी के बोर्ड लगाए जाएं। गृह विभाग की ओर से जानकारी दी गई कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना में 250 जवान को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इस वर्ष भारत सरकार द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुरूप प्रशिक्षण दिया गया है। इसके साथ ही गृह विभाग ने जिलों में जिला आपदा प्रबंधन कार्य योजना में आवश्यक उपकरण उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं। बैठक में निर्देश दिए गए कि शहरों और गाँव के निचले क्षेत्रों में बाढ़ की आशंका को देखते हुए निर्धारित केंद्रों पर खाद्य विभाग आवश्यक अनाज का भंडारण सुनिश्चित करें।

प्रमुख सचिव राजस्व आर के चतुर्वेदी ने बताया कि एक जून से 8 जुलाई की अवधि में इस वर्ष प्रदेश में गत वर्ष की तुलना में 62 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन एवं विकास श्री एस एन मिश्रा ने बताया कि शहरी क्षेत्रों में नालों की सफाई करवाई गई है। बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश की बाढ़ उत्पन्न करने वाली नदियों में नर्मदा, ताप्ती, बेतवा, कालीसिंध, केन, सोन और पार्वती शामिल हैं। इसी तरह बाढ़ से प्रभावित होने वाले जिलों में 33 जिले ग्वालियर, मुरैना, गुना, जबलपुर, नरसिंहपुर, होशंगाबाद, भिंड, दमोह, विदिशा, खंडवा, देवास, रायसेन, मंडला, छिंदवाड़ा, बैतूल, रतलाम, खरगोन, बालाघाट, सतना, रीवा, छतरपुर, शिवपुरी, झाबुआ, सागर , हरदा, बड़वानी, धार, श्योपुरकलां, नीमच, कटनी, डिंडौरी, सीहोर एवं मंदसौर शामिल हैं।

प्रदेश में वर्षा की स्थिति

इस वर्ष 1 जून से 8 जुलाई 2014 तक की अवधि में गत वर्ष की तुलना में मध्यप्रदेश में 62 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। इस वर्ष 18 जिलों में 75 प्रतिशत से कम, 18 जिलों में 50 से 75 प्रतिशत कम और 14 जिलों में 50 प्रतिशत से कम वर्षा हुई है। गत वर्ष 1 जून 2013 से 30 सितंबर 2013 के मध्य हुई वर्षा के आधार पर प्रदेश के 42 जिलों में सामान्य से 20 प्रतिशत अधिक वर्षा और 9 जिलों में सामान्य या सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई थी।

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