भारत छोड़ो आन्दोलन की 72वीं वर्षगाँठ

भोपाल, अगस्त 2014/ राज्यपाल राम नरेश यादव ने 9 अगस्त को भारत छोड़ो आन्दोलन की 72 वीं वर्षगाँठ पर देश की आजादी के संघर्ष के दौरान अपने प्राण गँवाने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को श्रद्धांजलि दी है। भारत छोड़ो आन्दोलन की वर्षगाँठ पर राज्यपाल 9 अगस्त 2014 को पुरानी विधान सभा के प्रांगण स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करेंगे।

राज्यपाल ने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन सही मायने में एक जन-आंदोलन था जिसमें लाखों आम भारतीय शामिल थे। इस आंदोलन ने युवाओं को बड़ी संख्या में अपनी ओर आकर्षित किया। छात्रों ने कॉलेज की पढ़ाई छोड़कर जेल का रास्ता अपनाया। महात्मा गांधी ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत 9 अगस्त 1942 का दिन चुना था। इस आंदोलन को लाल बहादुर शास्त्री जैसे छोटे कद के व्‍यक्ति ने प्रचंड रूप दे दिया। श्री जयप्रकाश नारायण जैसे समाजवादी सदस्य भूमिगत प्रतिरोधी गतिविधियों में सबसे ज्यादा सक्रिय रहे।

श्री यादव ने कहा है कि विश्वविख्यात काकोरी-काण्ड के ठीक सत्रह साल बाद 9 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी के आव्हान पर समूचे देश में अंग्रेजों भारत छोड़ो आन्दोलन आरम्भ हुआ। भारत छोड़ो आन्दोलन या अगस्त क्रांति भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की अंतिम महान लड़ाई थी, जिसने ब्रिटिश शासन की नींव को हिलाकर रख दिया। क्रिप्स मिशन के खाली हाथ भारत से वापस जाने पर भारतीयों को अपने छले जाने का अहसास हुआ। यह भारत को तुरंत आजाद करने के लिए अंग्रेजी शासन के विरूद्ध सविनय अवज्ञा आंदोलन था। महात्मा गाँधी के आव्हान पर इसमें स्त्री, पुरूष, बूढ़े सभी जुड़ गए और पाँच साल के लंबे संघर्ष के बाद 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ।

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