मध्यप्रदेश दे रहा है बालिका शिक्षा को निरंतर बढ़ावा

भोपाल, जुलाई 2014/ मध्यप्रदेश सरकार बालिकाओं की शिक्षा पर निरंतर ध्यान दे रही है। एक और जहाँ बालिकाओं को घर-आँगन से निकल कर उन्हें स्कूल जाने के लिये प्रेरित किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर उनके लिये नि:शुल्क सायकिल, गणवेश, पाठ्य-पुस्तकें आदि की व्यवस्था भी की गई है। सरकार के सार्थक प्रयासों का ही परिणाम है कि मध्यप्रदेश में बालिका शिक्षा में निरंतर सुधार आ रहा है।

मध्यप्रदेश में बालिकाओं को नि:शुल्क गणवेश वितरण की व्यवस्था की गई है। कक्षा एक से कक्षा 8वीं तक अध्ययनरत 94 लाख बालक-बालिकाओं को दो जोड़ी गणवेश के लिये 400 रुपये प्रति विद्यार्थी के मान से दिये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर तीन वर्ष पूर्व से बालकों को भी दो जोड़ी गणवेश के लिये राशि दी जा रही है। पाँचवीं कक्षा उत्तीर्ण कर छठवीं में पड़ोस के गाँव के शासकीय स्कूल में पढ़ने जाने वाली बालिकाओं को नि:शुल्क सायकिल के लिये 2300 रुपये प्रति सायकिल उपलब्ध करवाये जा रहे हैं। इस योजना के प्रारंभिक वर्ष 2009-10 एवं 2010-11 में केवल बालिकाओं को सायकिलें वितरित होती थीं। इन दो वर्ष में क्रमश: 2 लाख 2 हजार एवं 2 लाख 8 हजार बालिकाओं ने इस योजना का लाभ उठाया। मुख्यमंत्री श्री चौहान की मंशा के अनुरूप वर्ष 2011-12 से बालकों को भी इसमें शामिल किया गया। इस प्रकार वर्ष 2011-12 में 5 लाख 8 हजार 718, वर्ष 2012-13 में 5 लाख 7 हजार 590 तथा वर्ष 2013-14 में 5 लाख 22 हजार 833 बालक-बालिकाएँ योजना से लाभान्वित हुए। वर्ष 2013-14 में 3 लाख 30 हजार बालक-बालिकाओं को सरकार की ओर से सायकिल उपलब्ध करवाई गईं। इनमें 37 प्रतिशत अनुसूचित-जाति एवं 17 प्रतिशत अनुसूचित-जनजाति के विद्यार्थी शामिल हैं।

प्रदेश में अनुसूचित जाति-जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्ग की छोटी-छोटी बसाहटों की बालिकाओं को माध्यमिक-स्तर की शिक्षा को पूर्ण करवाने के लिये कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय एवं बालिका छात्रावासों की व्यवस्था की गई है। इस योजना का लाभ 49 हजार 601 बालिकाएँ उठा रही हैं। कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय एवं बालिका छात्रावास के सहायक वार्डनों एवं रसोइयों को खान-पान प्रबंधन और हाउस-कीपिंग का होटल प्रबंधन संस्थान से प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है। कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय एवं बालिका छात्रावास की बालिकाओं के लिये यूनिसेफ के सहयोग से स्पोर्टस फॉर डेव्हलपमेंट योजना का क्रियान्वयन करवाया जा रहा है।

राज्य के शासकीय स्कूलों, पंजीकृत मदरसों एवं संस्कृत शालाओं में कक्षा एक से आठवीं तक अध्ययनरत लगभग 96 लाख विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष नि:शुल्क पाठ्य-पुस्तकें वितरित की जा रही हैं। इस योजना से बालिकाएँ भी बड़ी संख्या में लाभान्वित हो रही हैं। कक्षा 9 से 12वीं तक के बालक-बालिकाओं को नि:शुल्क पाठ्य-पुस्तक वितरण की योजना में वर्ष 2009-10 में 18 लाख, वर्ष 2010-11 में 19 लाख 23 हजार 554, वर्ष 2011-12 में 20 लाख 82 हजार 573, वर्ष 2012-13 में 23 लाख 10 हजार 500 एवं वर्ष 2013-14 में 24 लाख 17 हजार 203 छात्र-छात्राओं को लाभ पहुँचाया गया। कक्षा 6 से 8वीं तक अध्ययनरत बालकों के अलावा बालिकाओं को भी छात्रवृत्ति योजना का लाभ मिल रहा है। अपने माता-पिता की इकलौती संतान प्रतिभावान छात्राओं के लिये कक्षा दसवीं में 60 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने एवं कक्षा 11वीं, 12वीं में नियमित छात्रा के रूप में अध्ययन करने पर छात्रवृत्ति देने की व्यवस्था की जा रही है। इसका भुगतान समग्र छात्रवृत्ति योजना में किये जाने की कार्यवाही प्रचलन में है।

प्रदेश की समस्त विद्यालयों की छात्राओं को आत्म-रक्षा, शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिये जूडो-कराटे, ताईक्वांडो का विशेष प्रशिक्षण दिलवाया जा रहा है। गत वर्ष हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी में पढ़ने वाली लगभग 66 हजार बालिकाओं को आत्म-रक्षा का प्रशिक्षण दिया गया। प्रदेश में कक्षा 9 से 12वीं के लिये स्वीकृत 201 बालिका छात्रावास में से 200 बालिका छात्रावास संचालित हो रहे हैं। इन छात्रावास में लगभग 17 हजार बालिकाएँ अध्ययनरत हैं। प्रदेश एवं देश के विभिन्न प्रांतों में आयोजित शालेय खेलकूद प्रतियोगिताओं में भी बड़ी संख्या में बालिकाओं ने भाग लेकर पदक प्राप्त किये।

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