मध्यप्रदेश में मनरेगा का बेहतर अमल

भोपाल, फरवरी 2013/ महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के बेहतर अमल से मध्यप्रदेश में गाँवों की तस्वीर बदली है और जरूरतमंद ग्रामीण श्रमिकों को बड़े पैमाने पर रोजगार मुहैया हुआ हैं। मनरेगा के जरिये सार्वजनिक उपयोग की स्थायी परिसम्पत्तियों के निर्माण में मध्यप्रदेश देश में अव्वल है। मनरेगा अभिसरण से ग्रामीण विकास की विभिन्न योजनाओं में 58 फीसदी स्थायी परिसम्पत्तियाँ निर्मित हुई है जो देश में सर्वाधिक है। मनरेगा के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर निरंतर बेहतर प्रदर्शन किया जा रहा है। भारत सरकार की नवीनतम त्रैमासिक डिलेवरी मॉनीटरिंग यूनिट (डीएमयू) की रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश अन्य राज्यों की तुलना में प्रदर्शन के आधार पर 5 श्रेणी में प्रथम 10 राज्य में सम्मिलित है। भारत सरकार के योजना आयोग द्वारा त्रैमासिक समीक्षा की डीएमयू रिपोर्ट तैयार की जाती है। माह दिसम्बर 2012 की डीएमयू रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश का देश में मनरेगा के अंतर्गत कुल व्यय में 5वाँ स्थान, परिवारों को रोजगार उपलब्ध करवाने में छठवाँ स्थान, मानव दिवस सृजन में छठवाँ स्थान, 100 दिवस का कार्य पूर्ण करने वाले परिवारों की संख्या में सातवाँ और अनुसूचित मानव दिवस सृजन में दसवाँ स्थान है।

पिछले छह वर्ष में अब तक मनरेगा के अंतर्गत हितग्राहीमूलक योजना और समुदायमूलक विकास कार्यों पर 20942 करोड़ की राशि खर्च हो चुकी है इसमें से अकुशल श्रम के रूप में मजदूरी भुगतान पर 12486.67 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। पिछले छह वर्ष में अब तक 14972.75 लाख मानव दिवस का रोजगार जरूरतमंद ग्रामीण श्रमिकों को मुहैया करवाया गया है। इनमें अनुसूचित जाति के श्रमिकांे को 2733.41 लाख मानव दिवस और अनुसूचित जन जाति के श्रमिकों को 6528.52 लाख मानव दिवस का रोजगार उपलब्ध हुआ है। मनरेगा के तहत रोजगार हासिल करने वाले ग्रामीणों में 43 प्रतिशत महिला श्रमिक हैं। महिला श्रमिकों को पिछले छह साल में 6478.83 मानव दिवस का रोजगार मुहैया हुआ है। रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों की तरफ ग्रामीण मजदूरों का पलायन रोकने में सफलता मिली है और उन्हें अपने गाँव में ही 100 दिन का रोजगार मिल रहा है।

मनरेगा के निर्माण कार्यों की त्रुटियों तथा अनियमितताओं और गंभीर शिकायतों की पड़ताल के लिये समय-समय पर एक जिले से दूसरे जिले में तकनीकी दलों को भेजकर भी जाँच की जा रही है। वर्ष 2007 में सितम्बर से दिसम्बर माह तक सीधी जिले में ग्राम-पंचायतों में हुए निर्माण कार्यों का सघन निरीक्षण किया गया था। जाँच के दौरान अनियमित निर्माण कार्यों के मामलों में दोषी पाये गये 100 व्यक्तियों के विरुद्ध कार्यवाही कर 8 करोड़ 32 लाख की वसूली की गई थी। वर्ष 2011 में जिला उमरिया के 120 कार्य की सघन जाँच की गई थी। दोषी पाये गये लोगों के विरुद्ध संभाग आयुक्त शहडोल और राज्य-स्तर से कार्यवाही की गई थी।

 

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