महिलाओं ने बनाया सामुदायिक बीमा संगठन

भोपाल, नवंबर 2012/ मध्यप्रदेश के भ्रमण पर आये विश्व बैंक दल ने आज पन्ना, रीवा, सागर एवं नरसिंहपुर जिले का भ्रमण कर स्व-सहायता समूहों एवं ग्राम उत्थान समितियों में शामिल महिलाओं से उनके द्वारा प्रारम्भ की गई आजीविका गतिविधियों से उनकी आमदनी में हो रही वृद्धि के संबंध में जानकारी प्राप्त की। पन्ना जिले के भ्रमण के दौरान विश्व बैंक के टास्क टीम लीडर केविन क्रॉक फोर्ड एवं अन्य सदस्यों ने जिला गरीबी उन्मूलन परियोजना (डी.पी.आई.पी.) की पहल पर एक अभिनव प्रयास के रूप में प्रारम्भ समुदाय आधारित बीमा संगठन में शामिल महिलाओं से चर्चा की। समिति की अध्यक्ष राजकुमारी यादव एवं उपाध्यक्ष अनिता विश्वकर्मा ने विश्व बैंक दल को बीमा संगठन के उद्देश्यों एवं कार्यप्रणाली से अवगत करवाया।

उल्लेखनीय है पन्ना जिले के सुदूर गाँवों के स्व-सहायता समूहों में शामिल महिलाओं द्वारा समुदाय आधारित बीमा संगठन बनाया गया है। इस सामूहिक सामाजिक सुरक्षा कोष से अभी तक 4,926 महिलाएँ जुड़ चुकी हैं। महिलाओं ने इस कोष में अभी तक 14 लाख 78 हजार रुपये जमा किये हैं। कोष के जरिये 15 प्रकरण में सवा दो लाख की राशि त्वरित सहायता के रूप में उपलब्ध करवाई गई है। कोष का संचालन जिला स्तर पर गठित महिला समिति द्वारा किया जा रहा है। अनेक गाँवों में ग्राम उत्थान समितियों के माध्यम से समूहों में शामिल महिलाओं का बीमा भी करवाया गया है।

विश्व बैंक दल ने आज रीवा जिले के गेरूआर एवं पहाड़ी गाँव में डी.पी.आई.पी. के समूहों में शामिल महिलाओं से चर्चा कर उनके द्वारा मुर्गीपालन व्यवसाय से जुड़कर अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में प्रारम्भ प्रयासों की जानकारी हासिल की। इन दोनों गाँव में लगभग 61 महिलाएँ मुर्गीपालन गतिविधि से जुड़ी हैं। इनके द्वारा 61 शेड में मुर्गीपालन का काम किया जा रहा है। मुर्गीपालन व्यवसाय में लगी महिलाओं को तकरीबन ढाई से तीन हजार रुपए की आमदनी हो रही है। महिलाओं ने बताया कि वे अपने बच्चों की तरह चूजों की देखभाल बड़े जतन से करती हैं। उन्हें इस व्यवसाय से घर बैठे पैसे मिल जाते हैं और वे मजदूरी करने नहीं जाती।

रीवा के जिला परियोजना प्रबंधक डी.पी. सिंह ने बताया कि पी.पी.सी.पी. मॉडल के तहत रीवा में पोल्ट्री सेक्टर विकसित करने का कार्य हाथ में लिया गया है। इसमें जिला पंचायत द्वारा 32 लाख 49 हजार की राशि कन्‍वर्जेंस के जरिये उपलब्ध करवाई गई है। विश्व बैंक दल ने इसके पूर्व रीवा जिले के करहिया एवं बिसार गाँव का भ्रमण कर समूहों की महिलाओं द्वारा प्रारम्भ सब्जी उत्पादन गतिविधि का अवलोकन किया। यहाँ सब्जी की खेती में ड्रिप सिंचाई पद्धति का इस्तेमाल किया जा रहा है।

रीवा में एक बैठक में विश्व बैंक दल के साथ जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती माया सिंह पटेल एवं जिला कलेक्टर एस.एन. रूपला ने डी.पी.आई.पी. परियोजना की गतिविधियों के संबंध में चर्चा की। जिला परियोजना प्रबंधक डी.पी. सिंह द्वारा प्रेजेंटेशन के माध्यम से जिले में संचालित गतिविधियों से अवगत करवाया गया। इस मौके पर स्व-सहायता समूहों के बैंक लिंकेज में अग्रणी भूमिका के लिए यूनियन बैंक के मैनेजर नरेश कुमार को प्रशस्ति-पत्र दिया गया। दल ने डी.पी.आई.पी. द्वारा प्रवर्तित क्रॉप प्रोड्यूसर कम्पनी के आउटलेट का अवलोकन कर शेयर होल्डर से चर्चा की।

विश्व बैंक दल ने सागर जिले के कंजेरा गाँव का भ्रमण कर वहाँ पॉली मल्चिंग की नवीन तकनीक से की जा रही टमाटर तथा अन्य सब्जियों की खेती का अवलोकन किया। कंजेरा में गठित श्रीराम स्व-सहायता समूह की सदस्यों द्वारा इस तकनीक से सब्जी की खेती करने से प्राप्त फायदों से अवगत करवाया गया। विश्व बैंक दल ने नरसिंहपुर जिले के मानेगाँव, डोंगरगाँव एवं बिछुआ का भ्रमण कर ग्राम उत्थान समिति के पदाधिकारियों से चर्चा की एवं महिलाओं द्वारा प्रारम्भ सेनेटरी नेपकिन तैयार करने की गतिविधि का अवलोकन किया।

विश्व बैंक दल में टास्क टीम लीडर केविन क्रॉक फोर्ड के साथ सुश्री मकिको, समिक दास, सुश्री पापिया भट्टाचार्य, सुश्री गीतिका, सुश्री श्रुति, शोविक, अतिन कुमार एवं वरुण सिंह आदि शामिल हैं।

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