महिला सशक्तिकरण एवं सेक्टर विकास कार्यों की सराहना

भोपाल, नवंबर 2012/ जिला गरीबी उन्मूलन परियोजना (डी.पी.आई.पी.) के जरिये स्व-सहायता समूहों के रूप में संगठित होकर समूहों की महिलाओं के आत्म-विश्वास एवं जागरूकता में वृद्धि हुई है। महिलाओं द्वारा प्रारम्भ विभिन्न आजीविका गतिविधियों से उनकी और उनके परिवार की आमदनी में इजाफ़ा हुआ है। ग्राम सभाओं में भागीदारी बढ़ने से शासन की योजनाओं के प्रति महिलाओं की जागरूकता बढ़ी है तथा वे विभिन्न योजनाओं का लाभ उठा रही हैं। नियमित रूप से बचत करना उनकी आदत में शुमार हो रहा है और महिलाएँ स्वयं बैंक जाकर लेन-देन करने लगी हैं।

मध्यप्रदेश के भ्रमण पर आये विश्व बैंक दल के साथ दो दिवसीय राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में यह जानकारी दी गई। विश्व बैंक के टास्क टीम लीडर श्री केविन क्रॉक फोर्ड समेत दल के अन्य सदस्यों ने डी.पी.आई.पी. गाँवों के भ्रमण के अपने अनुभव शेयर करते हुए परियोजना द्वारा महिला सशक्तिकरण की दिशा, सेक्टर विकास एवं नवाचार के तहत डेयरी, पोल्ट्री, सब्जी उत्पादन, कपड़ों की सिलाई, अगरबत्ती बनाने, चारकोल ब्रिकिट्स, डोरमेट निर्माण आदि के कार्यों की सराहना की। इन गतिविधियों से जुड़कर महिलाओं की आमदनी में वृद्धि को रेखांकित करते हुए दल ने समुदाय के क्षमता-वर्द्धन एवं महिला समूहों के बैंक लिंकेज पर जोर दिया। दल ने परियोजना क्रियान्वयन में राज्य, जिला एवं मैदानी स्तर पर कार्यरत अमले को कार्य कुशल और प्रशिक्षित बताते हुए काय की सराहना की।

बैठक के प्रारम्भ में परियोजना समन्वयक श्री एल.एम. बेलवाल ने बताया कि 26 हजार 346 स्व-सहायता समूहों के जरिये 3 लाख 3 हजार 812 महिलाएँ समूहों में संगठित होकर आजीविका गतिविधियों में संलग्न हैं। समूहों के ग्राम स्तरीय संगठन के रूप में 3,130 से अधिक ग्राम उत्थान समितियाँ गठित की गई हैं। समूहों द्वारा 17 करोड़ 12 लाख से अधिक राशि की बचत की गई है। समूहों का 9 करोड़ 13 लाख रुपये से अधिक का बैंक लिंकेज करवाया गया है। रोजगारोन्मुखी कार्यक्रम के तहत रोजगार मेलों के माध्यम से 91 हजार 768 युवाओं को विभिन्न कम्पनियों एवं संस्थानों में जॉब ऑफर प्रदान कर 16 हजार से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिलाकर रोजगार से जोड़ा जा रहा है। समूहों द्वारा उत्पादित ताजा सब्जियों की बिक्री के लिये 25 ‘आजीविका फ्रेशआउटलेट स्थापित किये गये हैं।

आमदनी में 45 प्रतिशत वृद्धि आँकी

परियोजना के प्रोक्योरमेंट समन्वयक रमन वाधवा ने अपने प्रेजेंटेशन में बताया कि लगभग 72 फीसदी ग्रेडेड समूह सदस्यों की आमदनी में लगभग 45 प्रतिशत की वृद्धि आँकी गई है। समूहों की कृषि संबंधी गतिविधियों से आय में 35 प्रतिशत तथा कुल परिसम्पत्तियों में लगभग 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। समूहों में शामिल लगभग 29 हजार से अधिक परिवारों ने धुँआरहित चूल्हों की स्थापना की है। परियोजना क्षेत्र के राजगढ़, गुना, शिवपुरी, सीधी एवं पन्ना जिलों के गाँवों में सौर ऊर्जा से प्रकाश एवं सौर ऊर्जा चलित मोबाइल चार्जिंग स्टेशन स्थापित किये गये हैं।

बैठक में केविन क्रॉक फोर्ड के साथ सुश्री मकीको, पापिया भट्टाचार्य, गीतिका, प्रीति कुमार, श्रुति, श्री शोविक, समिक दास, अतिन कुमार एवं वरुण सिंह समेत राज्य परियोजना इकाई के सभी समन्वयक एवं जिला परियोजना प्रबंधक उपस्थित थे।

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