मानस में वास्तविक समाज-व्यवस्था की कल्पना

भोपाल, अगस्त 2014/ राज्यपाल रामनरेश यादव ने राजभवन में तुलसी मानस प्रतिष्ठान द्वारा तुलसी जयंती के सात दिवसीय कार्यक्रम के विदाई समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि रामचरित मानस सबको प्रेरणा देने वाला, मानव से मानस को मिलाने वाला एक ऐसा महाकाव्य है जो युगों-युगों तक प्रासंगिक रहेगा। मनुष्य के जीवन में चरित्र के बिना ज्ञान का कोई महत्व नहीं है। तुलसीदासजी के रामचरित मानस में मानव जीवन की वास्तविकताओं पर आधारित समाज-व्यवस्था की कल्पना है। इस अवसर पर राज्यपाल ने मानस मर्मज्ञ दीदी मन्दाकिनी को शॉल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया।

राज्यपाल ने कहा कि श्री राम मर्यादा पुरूषोत्तम के नाम से प्रसिद्ध हैं। वर्तमान समय में देश में फैली कुरीतियों और कठिनाइयों से मुक्ति के लिए मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम की मर्यादा, अनुशासन और संयम को आत्मसात करना होगा।

मानस मर्मज्ञ दीदी मंदाकिनी ने प्रवचन में कहा कि वर्तमान समय में भी भगवान श्रीराम के रामराज्य की संभावना साकार हो सकती है। श्रीराम ने छल कपट, कूटनीति और अवसरवाद की राजनीति से दूर रहकर मानवीय पद्धति के आधार पर राम-राज्य की स्थापना की। उनका राम-राज्य सबके सुख-समृद्धि और समानता के लिए था। दीदी मन्दाकिनी ने चरित्र और लीलाओं में भेद बताते हुए कहा कि व्यक्ति का निजी स्वभाव चरित्र होता है और व्यक्ति द्वारा किसी मंच पर भूमिका का मंचन करना लीला होता है।

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