मैला ढोने की प्रथा खत्‍म करने आएगा सख्‍त कानून

भोपाल, नवंबर 2012/ केन्द्रीय पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि केन्द्र शीघ्र ही ऐसा कानून बनायेगा जिसके अंतर्गत शुष्क शौचालय का उपयोग करने वालों को कड़ी सजा मिलेगी और उन्हें जेल भी हो सकती है। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश में राज्य सरकार मैला ढोने की प्रथा को समूल नष्ट करने के लिये प्रतिबद्ध है। यदि कोई परिवार या व्यक्ति किसी मजबूरी से इस प्रथा से जुड़ा है तो उसे अन्य व्यवसाय शुरू करने के लिये राज्य सरकार द्वारा पूरा वित्तीय सहयोग दिया जायेगा। निर्मल भारत अभियान में मध्यप्रदेश अपना उत्कृष्ट योगदान देगा। सिर पर मैला ढोने की प्रथा समाप्त करने जैसे सामाजिक मुद्दों पर सभी राजनैतिक दलों को एक साथ मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है।

श्री रमेश और श्री चौहान यहाँ रवीन्‍द्र भवन में राष्ट्रीय गरिमा अभियान के अंतर्गत मैला-मुक्ति यात्रा के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस यात्रा में देश के विभिन्न प्रांतों की वे महिलाएँ शामिल हैं जिन्होंने मैला ढोने की प्रथा से मुक्ति पा ली है। इनमें मध्यप्रदेश की 11 हजार महिलाएँ हैं। यह यात्रा 30 नवम्बर से शुरू हो रही है और 31 जनवरी 2013 को 18 राज्य और 200 जिलों से होती हुई नई दिल्ली पहुँचेगी। यात्रा में शामिल महिलाएँ संदेश वाहक बनकर 50 हजार महिलाओं को इस कुप्रथा से मुक्ति दिलायेगी।

श्री चौहान ने कहा कि सभी धर्म मनुष्य को बराबरी का दर्जा देते हैं। किसी भी धर्म में ऊँच-नीच नहीं सिखायी जाती। राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के लाभ उठाने के लिये समुदाय को आगे आना होगा। उन्होंने उपस्थित समुदाय से अपील की वे अपने बच्चों को पढ़ने भेजें। राज्य सरकार हर तरह की शैक्षणिक सुविधाएँ उपलब्ध करने के लिये प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार और समुदाय साथ मिलकर काम करें तो क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकते हैं। प्रदेश में शुष्क शौचालयों के उपयोग को समाप्त किया जायेगा। इस संबंध में बने कानून का कड़ाई से पालन होगा। ऐसे परिवारों का पूरी तरह से आर्थिक पुनर्वास किया जायेगा, जो किसी न किसी कारण से मैला ढोने का कार्य कर रहे हैं।

केन्द्रीय पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि केन्द्र शीघ्र ही ऐसा कानून बनायेगा जिसके अंतर्गत शुष्क शौचालय का उपयोग करने वालों को कड़ी सजा मिलेगी और उन्हें जेल भी हो सकती है। उन्होंने मैला ढोने की प्रथा से मुक्ति पाने वाली महिलाओं के स्व-सहायता समूहों को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में सर्वोच्च प्राथमिकता देने की घोषणा करते हुए कहा कि ऐसे स्व-सहायता समूहों को बैंक से ऋण दिलावाने के साथ ही रोजगार संबंधी जरूरी प्रशिक्षण दिलाया जायेगा। अगले दस साल में भारत खुले में शौच जाने की स्थिति से पूरी तरह मुक्ति पा लेगा। कुछ राज्य इस दिशा में आगे बढ़े हैं। सिक्किम देश का पहला राज्य है जिसने खुले में शौच जाने की स्थिति समाप्त कर दी। केरल दूसरे नम्बर का राज्य है। इसके बाद हरियाणा और हिमाचल प्रदेश का नम्बर आता है। निर्मल भारत अभियान में पंद्रह सौ करोड़ रुपये की राशि शुष्क शौचालयों को फ्लश शौचालय में बदलने में उपयोग में लायी जायेगी।

श्री रमेश ने कहा कि भारत ने सभी क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति की है लेकिन दुखद स्थिति है कि 60 प्रतिशत महिलाएँ अब भी खुले में शौच जाती हैं। देश में 26 लाख शुष्क शौचालय उपयोग में आ रहे हैं। इनमें से 40 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में और 60 प्रतिशत शहरी क्षेत्रों में हैं। आज भी दो से तीन लाख परिवार मैला ढोने के काम में लगे हैं। इस स्थिति को समाप्त करने के लिये सरकारी कार्यक्रमों के अलावा सामाजिक और राजनैतिक आंदोलन की आवश्यकता है।

स्वामी अग्निवेश ने वाल्मीकी समुदाय का आव्हान किया कि वह स्वयं को कमजोर ना समझे। अपनी गरिमा और शक्ति को पहचाने। वाल्मीकी समाज की महिलाओं में चेतना जागृत करने वाली मंदसौर जिले की महिला लाली बाई के प्रयासों का अभिनंदन करते हुए सार्वजनिक रूप से चरण-स्पर्श किये। उज्जैन की तस्लीम बाई और राजस्थान के चित्तौड़ जिले की छोटी बाई ने अपने अनुभव बताये।

मध्यप्रदेश सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष गंगा राम ने कहा कि आयोग के समक्ष सिर पर मैला ढोने संबंधी कोई शिकायत नहीं मिली, जब भी ऐसा प्रकरण आयेगा, प्रभावी कार्रावाई की जायेगी। इस अवसर पर मेगसेसे पुरस्कार विजेता संदीप पाण्डेय, भारत सरकार के पूर्व सचिव पी.एस. कृष्ण, दलित चेम्बर ऑफ कामर्स एण्ड इंडस्ट्रीज के मिलिंद कामले और अशासकीय संगठनों के सदस्य उपस्थित थे।

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