युवाओं को रोजगार देने मुख्यमंत्री की घोषणाएं

भोपाल, जनवरी 2013/  मध्यप्रदेश में लाखों युवाओं को रोजगार देने की मुख्यमंत्री युवा रोजगार योजना प्रारंभ की जायेगी।

  • कौशल विकास के लिए प्रदेश में विकासखंड स्तर पर तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जायेगा।
  • 113 कौशल विकास केन्द्र ब्लाक स्तर पर आरंभ किए जा चुके हैं। अब अनुसूचित जनजाति बाहुल्य ब्लाक में, वन क्षेत्र में निवासरत लोगों महिलाओं तथा पंजीकृत श्रमिकों के लिए 47 कौशल विकास केन्द्र और खोले जायेंगे।
  • बालाघाट में चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा ए.एन.एम. पाठ्यक्रम संचालित करने के लिये स्थापित संस्था में उच्च स्तर के पाठ्यक्रमों का संचालन किया जाएगा।
  • प्रदेश में निजी निवेश से भी 200 कौशल विकास केंद्र स्थापित किए जायेंगे।
  • विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, सहारिया एवं भारिया समुदाय के लिये विशेष कौशल विकास केन्द्र प्रारंभ किये जायेंगे।
  • विशेष पिछड़ी जातियों के लिये अलग से विशेष कौशल विकास केंद्र प्रारंभ किये जायेंगे।
  • कृषि के क्षेत्र में किसानों एवं युवाओं के कौशल विकास के लिये 68 स्थानों पर व्यापक कौशल विकास के कार्यक्रम संचालित किए जायेंगे। इसमें बीज उत्पादन, जैविक खाद, मशरूम, वर्मिकल्चर, डेयरी, ट्रेक्टर मरम्मत जैसे लगभग 20 विधाओं में प्रशिक्षण दिया जायेगा।
  • कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिये कृषि विभाग द्वारा पांच स्किल डेवलमेंट सेंटर स्थापित कर कृषि यंत्रों के रिपेरिंग एवं सर्विसिंग आदि के प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किए जायेंगे। ये केन्द्र पवारखेड़ा (जिला होशंगाबाद, सतना, जबलपुर, भोपाल, ग्वालियर में होंगे।
  • लघु तथा मध्यम उद्योगों की गुणवत्ता युक्त टूलिंग्स जॉबवर्क तथा उच्च श्रेणी के प्रशिक्षुओं की मांग को देखते हुए भोपाल, जबलपुर तथा सतना में टूल रूप स्थापित किये जाएंगे। ऐसा केन्द्र इन्दौर में पहले से है।
  • प्रशिक्षण उपरांत रोजगार को बढ़ावा देने के लिए चार फिनिशिंग स्कूल प्रारंभ किये जायेंगे। इन स्कूलों में तकनीकी कौशल में दक्ष कारीगरों, टेक्नीशियनों को अन्य प्रशिक्षण यथा कम्युनिकेशन स्किल, अंग्रेजी, कम्प्यूटर इत्यादि प्रशिक्षण मिलेगा।
  • रोजगार कार्यालयों को मानव संसाधन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा जो कि निजी क्षेत्र की एजेंसी के सहयोग से केरियर मार्गदर्शन एवं प्लेसमेंट का कार्य करेगा।
  • जेल विभाग बैतूल एवं धार जिलों की तरह अन्य जिलों में कौशल विकास केंद्र खोले जायेंगे।
  • कौशल विकास की समस्त गतिविधियों को प्रशिक्षण से रोजगार तक की एक कड़ी के रूप में विकसित किया जाएगा। आईटीआई को आई.आई.टी. की तरह ब्रांड के रूप में विकसित किया जाएगा।
  • प्रत्येक आईटीआई में प्रशिक्षणार्थियों के बेहतर नियोजन के लिए प्लेसमेंट सेल बनाया जाएगा। प्रत्येक वर्ष एम्प्लायर्स कांक्लेव आयोजित किया जाएगा।
  • आईटीआई एवं पोलीटेक्निक महाविद्यालय के मेधावी विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित उद्योगों द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा।
  • प्रत्येक आईटीआई में कम्प्यूटर के कौशल विकास के लिए कम्प्यूटर लैब बनाई जाएगी।
  • शासकीय आईटीआई का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा तथा संचालित ट्रेड्स को एनसीवीटी से संबद्धता दिलवाई जाएगी।
  • अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के आईटीआई के प्रशिक्षणार्थियों की शिष्यवृत्ति में लगभग 70 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी।
  • तकनीकी शिक्षण संस्थाओं के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति, शिष्यवृत्ति प्रदाय करने को लोक सेवा गारंटी अधिनियम में सम्मिलित किया जाएगा।
  • वर्तमान में ऐसे व्यक्ति जो अपने हुनर में माहिर हैं परन्तु उन्होंने कोई औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त नहीं किया है ऐसे व्यक्तियों को संबंधित विद्या में कौशल दक्षता के प्रमाणीकरण के लिए प्रणाली विकसित कर, उनके कौशल का प्रमाणीकरण किया जाएगा।
  • विभिन्न विधाओं में दक्ष कामगारों को मास्टर क्राफ्टसमेन के रूप में प्रमाणीकृत किया जाएगा जो विशिष्ट दक्षता प्राप्त कर दूसरों को भी प्रशिक्षित कर सकेंगे।
  • ग्लोबल स्किल प्रतिस्पर्धा (ओलंपिक की तर्ज पर अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा) में भाग लेने के लिए प्रशिक्षणार्थियों को ट्रेनिंग दी जाएगी।
  • आईटीआई एवं पोलीटेक्निक महाविद्यालयों मे उदीयमान क्षेत्रों, जैसे कि मेकॉट्रॉनिक्स, इण्डस्ट्रीयल इलेक्ट्रॉनिक्स आदि, के पाठ्यक्रम प्रारंभ किये जाएंगे।
  • शासकीय इंजीनियरिंग, पोलीटेक्निक महाविद्यालयों एवं आईटीआई में वीडियो कांफ्रेंसिंग के द्वारा स्मार्ट क्लासरूम स्थापित किये जाएंगे।
  • तकनीकी शिक्षा के छात्रों में कम्यूनिकेशन स्किल विकसित करने के लिये सभी शासकीय पोलीटेक्निक महाविद्यालय एवं आईटीआई में हिन्दी, अंग्रेजी तथा अन्य भाषाओं में बेहतर संवाद क्षमता के लिए लेंग्वेज लैब की स्थापना की जाएगी।
  • प्रदेश के सभी पोलीटेक्निक महाविद्यालयों के केम्पस वाई-फाई युक्त किये जाएंगे जिससे इन्टरनेट सुविधा प्राप्त होगी।
  • व्यावसायिक शिक्षा (वोकेशनल एज्यूकेशन) में डिग्री एवं डिप्लोमा के पाठ्यक्रम प्रारंभ किये जाएंगे।
  • पांच पोलीटेक्निक महाविद्यालयों में कम्युनिटी महाविद्यालय प्रारंभ किये जाएंगे। इन कॉलेजों में दो वर्षीय डिग्री प्रोग्राम होगा। इनमें उद्योगों से तालमेल कर पाठ्यक्रम तैयार होगा।
  • कौशल विकास के प्रशिक्षकों को तैयार करने के लिये राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय भोपाल में इंस्टीट्यूट फॉर ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर स्थापित किया जाएगा।
  • प्रदेश में 50 करोड़ रुपये की लागत से पी.पी.पी. में अत्याधुनिक मल्टी स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित किया जाएगा। जिसमें विभिन्न नवीनतम ट्रेड्स को प्रारंभ किया जाएगा।
  • भवन विहीन 55 आई.टी.आई. के नए भवन बनाए जाएंगे।
  • उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप पोलीटेक्निक महाविद्यालय के पाठ्यक्रमों का पुनरीक्षण किया जाएगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here