राज्यों को ज्यादा केन्द्रीय मदद मिले

भोपाल, दिसम्बर 2014/ वित्त एवं वाणिज्यिक कर मंत्री जयंत मलैया ने नई दिल्ली में वित्त मंत्रियों की बजट-पूर्व बैठक में कहा है कि केन्द्रीय निधि के आवंटन में रघुराजन समिति की सिफारिशों पर ध्यान दिया जाये। राज्यों को ज्यादा से ज्यादा अनाबद्ध केन्द्रीय सहायता दी जाये इससे उन्हें लक्ष्य अर्जित करने में आसानी होगी। राज्यों के अंशदान में वृद्धि से उनके संसाधनों पर दबाव पड़ता है। केन्द्रीय योजनाओं में सहायता जारी होने में देरी को समाप्त किया जाये। केन्द्रीय भागीदारी वाले हिस्से को अग्रिम रूप से जारी किया जाये। कुछ मूल-भूत आर्थिक सूचकांकों के आधार पर राजकोषीय घाटे की सीमा में भी छूट दी जाये। बैठक की अध्यक्षता केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने की। बैठक में केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री जयन्त सिन्हा भी उपस्थित थे।

श्री मलैया ने कहा कि उज्जैन में वर्ष 2016 में होने वाले सिंहस्थ महाकुम्भ के लिये 2800 करोड़ की लागत से अधोसंरचना निर्माण का काम हाथ में लिया गया है। केन्द्र सरकार इस कार्य के लिये पर्याप्त सहायता दे। मध्यप्रदेश में 26,000 करोड़ की नदी जोड़ो परियोजना में भी सहयोग किया जाए जिससे 6 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित हो सकेगी।

सी.एस.टी. प्रतिपूर्ति का मुद्दा उठाते हुए श्री मलैया ने कहा कि 2010-11 से अब तक सी.एस.टी. क्षतिपूर्ति की कोई राशि स्वीकृत नहीं हुई। राज्य को अगर सी.एस.टी. की लम्बित राशि 568 करोड़ मिल जाये तो बहुत मददगार साबित होगी।

श्री मलैया ने अफीम डोडा पर प्रतिबन्ध का मुद्दा उठाते हुए कहा कि मध्यप्रदेश, राजस्थान तथा उत्तरप्रदेश ही अफीम के उत्पादक राज्य हैं। अफीम का उपयोग दर्द निवारक दवाएँ, केंसर रोगियों के लिये दर्द निवारकों एवं आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माण में होता है। अफीम दाना एवं अफीम डोडा अफीम की खेती के महत्वपूर्ण सह उत्पाद हैं जिससे किसानों को करोड़ों की अतिरिक्त वार्षिक आय होती है। लायसेन्स निष्पादन से राज्य को 115 करोड़ की राजस्व प्राप्ति होती है। अफीम डोडे के उत्पादन एवं विक्रय को 31 मार्च 2015 से प्रतिबन्धित किया जा रहा है। इस प्रतिबन्ध से राज्य के 25 हजार 541 कृषक प्रभावित होंगे और राज्य कोष को 115 करोड़ रुपये की क्षति होगी।

वित्त मंत्री ने राष्ट्रीय आपदा राहत कोष में मध्यप्रदेश के लिये वर्ष 2013-14 के विशेष पेकेज की पूर्ण राशि जारी करने का आग्रह किया। काले धन के विरुद्ध लड़ाई में कर प्रशासनों के मध्य सहयोग को महत्वपूर्ण निरूपित करते हुए 360 डिग्री डाटा समन्वय की वकालत की। स्टाम्प शुल्क अधिनियम तथा वस्तु एवं सेवाकर के युक्तियुक्तकरण पर भी बल दिया।

ई-कामर्स के आर्थिक-सामाजिक प्रभावों का उल्लेख करते हुए श्री मलैया ने ई-कामर्स में कराधान के मुद्दे सुलझाने की बात सामने रखी। कहा कि ई-कामर्स की गतिशील दुनिया में कर व्यवस्था को भी तदनुसार गतिशील होने की आवश्यकता है। प्रदेश के प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर मनोज श्रीवास्तव तथा वित्त सचिव मनीष रस्तोगी भी बैठक में शामिल हुए।

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